नीरज सिसौदिया, बरेली
सपा कार्यालय पर आज भारत रत्न, समाजवादी चिंतक कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनाई गई।
इस मौके पर कार्यालय पर महानगर अध्यक्ष शमीम खाँ सुल्तानी की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसका संचालन अनिल श्रीवास्तव सविता द्वारा किया गया।
इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष शमीम सुल्तानी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर एक प्रमुख भारतीय राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनका जन्म 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था। वह एक दलित परिवार से ताल्लुक रखते थे और उन्होंने अपने जीवनकाल में दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
जननायक कर्पूरी ठाकुर ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1950 के दशक में की थी। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और बाद में उन्होंने जनक्रांति दल की स्थापना की। वह 1970 के दशक में बिहार के मुख्यमंत्री भी बने थे।
इस कड़ी में महासचिव पंडित दीपक शर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर की सबसे बड़ी उपलब्धि थी बिहार में दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना। उन्होंने दलितों के लिए आरक्षण की मांग की और उन्हें शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए काम किया।
महानगर उपाध्यक्ष एवं शहर विधानसभा प्रभारी शेर सिंह गंगवार ने बताया कर्पूरी ठाकुर का निधन 17 फरवरी 1988 को हुआ था। उनकी विरासत आज भी बिहार और पूरे भारत में दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में सविता समाज के गणमान्य लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे।
कार्यक्रम में महानगर उपाध्यक्ष एवं कैंट प्रभारी राजेश मौर्या, बाबा साहब वाहिनी के रणवीर जाटव एवं सुरेंद्र सोनकर, कैंट विधानसभा अध्यक्ष हरिओम प्रजापति,एडवोकेट श्यामवीर सिंह यादव, सचिव नाजिम कुरैशी, महेन्द्र राजपूत, हैप्पी यादव, चंद्र सेन पाल, अनिल श्रीवास्तव सविता, सीमा श्रीवास्तव, धीरेंद्र सविता, रतन सविता, यादवेन्द्र सिंह एडवोकेट आदि मौजूद रहे।





