नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के बरेली जिला अध्यक्ष पद से शिवचरण कश्यप की विदाई के बाद जिले की सियासत में नई हलचल तेज हो गई है। जैसे ही यह पद खाली हुआ, वैसे ही इसके लिए दावेदारों की संख्या अचानक बढ़ती नजर आने लगी। हालांकि, इस भीड़ में हर नाम समान रूप से मजबूत नहीं माना जा रहा। पार्टी के भीतर जानकार मानते हैं कि वही दावेदार गंभीर माने जा रहे हैं, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं, जमीन पर काम किया है और हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं। ऐसे ही नामों में एक नाम महेंद्र सिंह लोधी राजपूत का भी है, जो इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

महेंद्र सिंह लोधी इस समय समाजवादी पार्टी में महानगर सचिव के पद पर हैं और लोधी समाज से आते हैं। समाजवादी पार्टी के बहुचर्चित पीडीए फॉर्मूले की कसौटी पर उन्हें पूरी तरह फिट माना जा रहा है। पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग, जिसे समाजवादी पार्टी अपनी राजनीति की धुरी मानती रही है। बरेली जिले में अब तक जितने भी जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं, वे सभी पिछड़े वर्ग से ही रहे हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो महेंद्र सिंह लोधी का सामाजिक आधार पार्टी की अब तक की रणनीति से मेल खाता है। खास बात यह भी है कि लोधी समाज से अब तक किसी नेता को जिला अध्यक्ष बनने का अवसर नहीं मिला है। यही वजह है कि इस बार इस समाज के भीतर भी उम्मीदें बढ़ी हुई हैं और महेंद्र सिंह लोधी को एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।

यह कहना गलत होगा कि महेंद्र सिंह लोधी की नजर जिला अध्यक्ष पद पर शिवचरण कश्यप के हटने के बाद ही पड़ी। पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि वह काफी समय से खुद को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार कर रहे थे। यही कारण है कि बीते वर्षों में उन्होंने संगठन और समाजसेवा दोनों मोर्चों पर अपनी सक्रियता लगातार बढ़ाई है। पार्टी के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी आम बात हो चुकी है। चाहे बैठक हो, धरना-प्रदर्शन हो या कोई संगठनात्मक कार्यक्रम, महेंद्र सिंह लोधी अक्सर आगे की पंक्ति में नजर आते हैं।

संगठन के साथ-साथ समाजसेवा के क्षेत्र में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय मानी जाती है। जरूरतमंदों को वस्त्र वितरण, गरीब परिवारों की मदद और आपदा के समय राहत कार्यों में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई है। पंजाब में आई बाढ़ के दौरान पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी उनका नाम सामने आया। ऐसे कार्यों के जरिए उन्होंने सिर्फ पार्टी कार्यकर्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है।

महेंद्र सिंह लोधी की एक खास पहचान यह भी है कि वह समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं से भावनात्मक और वैचारिक जुड़ाव को सार्वजनिक रूप से दर्शाते हैं। अपने घर और कार्यालय पर नेताजी मुलायम सिंह यादव, पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव सहित अन्य समाजवादी नेताओं की जयंती, पुण्यतिथि और जन्मदिवस का आयोजन करना वह नहीं भूलते। वैसे तो पार्टी कार्यालयों में इस तरह के आयोजन सामान्य बात हैं, लेकिन निजी स्तर पर अपने घर पर ऐसे कार्यक्रम करना उनके समर्पण और प्रतिबद्धता को दिखाता है। इससे उनके आसपास के लोग और मोहल्ले के निवासी भी समाजवादी विचारधारा से जुड़ने का संदेश पाते हैं।

पार्टी से जुड़े कुछ लोग बताते हैं कि उनकी बिरादरी के कई नेता सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए पार्टी कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन महेंद्र सिंह लोधी इन अवसरों को जनसंपर्क और विचारधारा के प्रसार का माध्यम बनाते हैं। यही वजह है कि संगठन के भीतर उनकी सक्रियता को गंभीरता से लिया जा रहा है।
इसके अलावा रक्तदान शिविर, साइकिल रैली और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में भी वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। हाल ही में जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया, तो महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी के नेतृत्व में इस अभियान को सफल बनाने में महेंद्र सिंह लोधी की भूमिका भी अहम मानी गई। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और लोगों को जागरूक करने में उन्होंने काफी मेहनत की।
पार्टी कार्यालय पर शायद ही कोई ऐसा आयोजन होता हो, जिसमें महेंद्र सिंह लोधी की उपस्थिति न हो। यही निरंतरता उन्हें कई अन्य दावेदारों से अलग खड़ा करती है। मात्र 43 वर्ष की उम्र में जिस तरह का सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता का जज्बा उनमें देखने को मिलता है, वह उन्हें एक उभरते हुए नेता के रूप में स्थापित करता है।
अब सवाल यही है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व बरेली के जिला अध्यक्ष पद के लिए किसे चुनता है। क्या महेंद्र सिंह लोधी को उनकी मेहनत, सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक सक्रियता का इनाम मिलेगा, या फिर उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा, 0इसका फैसला आने वाले दिनों में हो जाएगा। फिलहाल इतना तय है कि जिला अध्यक्ष की दौड़ में उनका नाम हल्के में नहीं लिया जा सकता।





