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सवालों के घेरे में हरदोई के जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह, समाजवादी पत्नी के साथ अखिलेश यादव से मुलाकात की तस्वीर हुई वायरल, केपी सिंह बोले- एआई से बनाई गई फर्जी तस्वीर, मैं कार्यालय में था, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

हरदोई जिले में तैनात जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह इन दिनों एक वायरल तस्वीर को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही इस तस्वीर में केपी सिंह अपनी पत्नी और समाजवादी पार्टी की नेत्री शालिनी सिंह के साथ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मुलाकात करते हुए हाथ जोड़कर अभिवादन करते दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय की बताई जा रही है। तस्वीर सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

दरअसल, केपी सिंह की पत्नी शालिनी सिंह पिछले कई वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे स्थान पर रहीं। चुनावी हार के कुछ समय बाद शालिनी सिंह ने बहुजन समाज पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद से वह लगातार सपा की गतिविधियों में सक्रिय नजर आ रही हैं।

बताया जा रहा है कि शालिनी सिंह फरीदपुर विधानसभा सीट से आगामी चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी कर रही हैं। इसी सिलसिले में वह 25 जनवरी को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंची थीं और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। इसी दौरान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें शालिनी सिंह के साथ उनके पति केपी सिंह भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने नीले रंग का कोट और सफेद रंग की पैंट एवं सफेद रंग की ही शर्ट भी पहनी हुई। तस्वीर में तीनों को एक साथ खड़े होकर अभिवादन करते हुए देखा जा सकता है। इस तस्वीर के अलावा इस मुलाकात की एक और तस्वीर सपा के पोर्टल पर अपलोड की गई है जिसमें यही कपड़े पहने हुए एक शख्स शालिनी सिंह के ठीक पीछे खड़ा नजर आ रहा है लेकिन उस शख्स का चेहरा तस्वीर में दिखाई नहीं दे रहा है। कुछ सपा कार्यकर्ताओं ने इस कथित मुलाकात का  वीडियो भी बनाया है।

इस तस्वीर के सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि भाजपा सरकार में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तैनात केपी सिंह का विपक्षी दल के नेता के कार्यालय में जाना क्या नियमों के अनुरूप है। इसको लेकर कुछ लोगों ने निष्पक्षता और सरकारी आचार संहिता पर भी सवाल खड़े किए। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।

मामले को लेकर जब जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने वायरल तस्वीर को पूरी तरह फर्जी बताया। उनका कहना है कि यह तस्वीर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का इस्तेमाल करके बनाई गई है और उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही है। केपी सिंह ने स्पष्ट किया कि 25 जनवरी को उनकी पत्नी शालिनी सिंह अखिलेश यादव से मिलने गई थीं, लेकिन वह स्वयं उनके साथ नहीं गए थे।

उन्होंने कहा कि उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और वह पूरी तरह एक सरकारी अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। उनकी पत्नी राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उसकी गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं है। केपी सिंह का दावा है कि जिस दिन की तस्वीर बताई जा रही है, उस दिन वह हरदोई स्थित अपने कार्यालय में मौजूद थे और अपने शासकीय कार्यों का निपटारा कर रहे थे।

अखिलेश यादव के साथ मुलाकात के दौरान शालिनी सिंह

वहीं दूसरी ओर, कुछ समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं का दावा है कि उन्होंने खुद पार्टी कार्यालय में केपी सिंह को अखिलेश यादव से मुलाकात करते हुए देखा है। उनका कहना है कि यदि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए और संबंधित दिन के मोबाइल लोकेशन डेटा तथा कार्यालय में उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड खंगाले, तो सच्चाई सामने आ जाएगी।  उनका यह भी कहना है कि जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि तस्वीर असली है या फर्जी। उन्होंने यह भी कहा कि शालिनी सिंह के पीछे खड़ा व्यक्ति अगर केपी सिंह नहीं है तो कौन है, इसकी जांच होनी चाहिए। उनका यह भी दावा है कि केपी सिंह ने 25 जनवरी को वही कपड़े पहने थे जो वायरल तस्वीर में पहने दिखाई दे रहे हैं। नीले कोट और सफेद पैंट-शर्ट वाला वो शख्स अगर केपी सिंह नहीं तो कौन था यह जांच का विषय है। वैसे तो सपा कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज में यह चेहरा कैद हो चुका है।

फिलहाल यह मामला चर्चा और आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। एक ओर केपी सिंह इसे एआई से बनाई गई फर्जी तस्वीर बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे वास्तविक मुलाकात करार दे रहे हैं। केपी सिंह का कहना है कि वह किसी भी प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। अब देखना होगा कि प्रशासन या सरकार इस पूरे मामले में कोई औपचारिक जांच कराती है या नहीं और वायरल तस्वीर की हकीकत क्या निकलकर सामने आती है।

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