नीरज सिसौदिया, बरेली
125 कैंट विधानसभा क्षेत्र में समाजसेवी और प्रख्यात चिकित्सक डॉ. अनीस बेग की सक्रियता अब केवल किसी एक कार्यक्रम या किसी एक बस्ती तक सीमित नहीं रह गई है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सहयोग और निरंतर संवाद के जरिए वाल्मीकि समाज और अन्य दलित वर्गों के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत की है, उसने उन्हें कैंट विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में एक अलग और प्रभावशाली पहचान दिला दी है। आज स्थिति यह है कि डॉ. अनीस बेग वाल्मीकि समाज के घर-घर तक पहुंच चुके हैं और उनके नाम को इस समाज में भरोसे और उम्मीद के रूप में देखा जाने लगा है।

राजनीतिक दृष्टि से कैंट विधानसभा सीट बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां वाल्मीकि समाज के मतदाताओं की संख्या लगभग 25 से 28 हजार बताई जाती है। यह समाज माधोबाड़ी, सुभाष नगर, बिहारीपुर, कालीबाड़ी, खुर्रम गौटिया सहित कई इलाकों में फैला हुआ है। अब तक इस वर्ग को परंपरागत रूप से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत वोट बैंक माना जाता रहा है। चुनाव दर चुनाव यह माना जाता रहा है कि वाल्मीकि समाज का झुकाव बड़ी संख्या में भाजपा की ओर रहता है। लेकिन पिछले कुछ समय से इस समीकरण में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है और इस बदलाव के केंद्र में डॉ. अनीस बेग का नाम तेजी से उभर रहा है।

पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से ही डॉ. अनीस बेग ने इन इलाकों में अपनी सक्रियता लगातार बढ़ाई। उन्होंने राजनीति को केवल मंचों और नारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे समाज के रोजमर्रा के दुख-दर्द से जोड़ने की कोशिश की। बीते लगभग तीन वर्षों में उन्होंने इन क्षेत्रों में चाय पर चर्चा, नुक्कड़ बैठकें, पीडीए सम्मेलन और सामाजिक संवाद के कई कार्यक्रम आयोजित किए। इन बैठकों का उद्देश्य केवल राजनीतिक संदेश देना नहीं था, बल्कि लोगों की समस्याओं को सुनना, उनके अनुभवों को समझना और उनके बीच यह भरोसा पैदा करना था कि कोई है जो उनके साथ खड़ा है।

डॉ. अनीस बेग की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा सेवा कार्यों पर आधारित रहा। पूरी सर्दियों के दौरान उन्होंने कैंट विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में कंबल वितरण और जैकेट वितरण जैसे कई राहत कार्यक्रम चलाए। इन कार्यक्रमों का असर केवल कुछ घंटों या कुछ दिनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव समाज के भीतर लंबे समय तक महसूस किया गया। रविवार को माधोबाड़ी वाल्मीकि बस्ती में आयोजित विशाल पीडीए महापंचायत, कंबल वितरण कार्यक्रम और खिचड़ी भोज इसी श्रृंखला का हिस्सा था। इस आयोजन में सैकड़ों जरूरतमंद बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और गरीब परिवारों को राहत मिली।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष शमीम खान सुल्तानी ने की। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष महिला सभा स्मिता यादव, महानगर अध्यक्ष महिला सभा गजल अंसारी, विधानसभा अध्यक्ष हरिओम प्रजापति, कैंट प्रभारी राजेश मौर्य, अंबेडकर वाहिनी राष्ट्रीय सचिव कुलदीप वाल्मीकि, दीपक वाल्मीकि, पंकज वाल्मीकि, लखन वाल्मीकि, अंकित वाल्मीकि और सोनू वाल्मीकि सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इन सभी की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि यह आयोजन केवल एक सेवा कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण संदेश देने वाला मंच बन चुका है।

डॉ. अनीस बेग का प्रभाव केवल कंबल वितरण जैसे कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। उन्होंने वाल्मीकि समाज की कई गरीब बेटियों की शादियों में भी अहम भूमिका निभाई है। कई परिवारों का कहना है कि जब उनके घर में शादी का सवाल आया और आर्थिक स्थिति आड़े आई, तब डॉ. अनीस बेग ने आगे बढ़कर मदद की। इसी तरह अपने अस्पताल में उन्होंने वाल्मीकि समाज के लोगों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। गंभीर बीमारी से जूझ रहे कई मरीजों को न केवल इलाज मिला, बल्कि सम्मान और अपनापन भी मिला।

इसके साथ ही डॉ. अनीस बेग लगातार इस समाज को शिक्षा के महत्व पर जोर देते रहे हैं। वह हर मंच से यह बात कहते हैं कि समाज का भविष्य बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा है। वे वाल्मीकि समाज के अभिभावकों को प्रेरित करते हैं कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें, उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें और उन्हें सीमाओं में न बांधें। उनका कहना है कि अगर आज का बच्चा पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस या पीसीएस अधिकारी बनता है तो वह केवल अपने परिवार का नहीं, पूरे समाज का भविष्य बदल देगा।
डॉ. अनीस बेग अक्सर अपने जीवन संघर्ष का उदाहरण देकर समाज को प्रेरित करते हैं। वह कहते हैं कि जब एक छोटे से गांव का बेटा, जो कभी तख्ती लेकर स्कूल जाता था और जमीन पर बैठकर पढ़ाई करता था, डॉक्टर बनकर अपना अस्पताल चला सकता है, लोगों को रोजगार दे सकता है और जरूरतमंदों की मदद कर सकता है, तो वाल्मीकि समाज का हर बच्चा भी पढ़-लिखकर ऊंचा मुकाम हासिल कर सकता है। उनका यह संदेश समाज के युवाओं और बुजुर्गों दोनों के बीच असर छोड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. अनीस बेग केवल भाषण देने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि वह जमीन पर उतरकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और मौके पर मदद करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि आज वाल्मीकि समाज में उनका नाम एक भरोसे के रूप में लिया जाने लगा है। कई लोगों का कहना है कि पहली बार उन्हें यह महसूस हुआ है कि कोई नेता उनके घर तक आकर उनकी परेशानी सुन रहा है।
रविवार को हुए आयोजन के बाद पूरे समाज में एक स्पष्ट संदेश गया है। पूरे कैंट विधानसभा क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि डॉ. अनीस बेग अब दलित राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं और दलित समाज का भरोसा जीतने में उन्हें लगातार सफलता मिल रही है। वाल्मीकि समाज के साथ-साथ अन्य दलित वर्गों में भी उनकी स्वीकार्यता बढ़ती दिखाई दे रही है। एक बड़ा दलित वर्ग अब उनके साथ जुड़ चुका है, जो आने वाले समय में राजनीतिक रूप से निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस वर्ग को अब तक भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता था, वहां डॉ. अनीस बेग की बढ़ती पकड़ आगामी विधानसभा चुनाव में समीकरण बदल सकती है। सेवा कार्य, सामाजिक जुड़ाव और शिक्षा पर जोर देने की उनकी रणनीति ने उन्हें इस समाज के बीच स्वीकार्य चेहरा बना दिया है। यही कारण है कि अब उन्हें केवल समाजसेवी या चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि एक संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में भी देखा जाने लगा है।
इस पूरे घटनाक्रम को विश्लेषणात्मक रूप से देखा जाए तो डॉ. अनीस बेग की राजनीति का आधार भावनात्मक अपील से ज्यादा व्यवहारिक सेवा पर टिका हुआ दिखाई देता है। उन्होंने न तो केवल नारों के सहारे अपनी पहचान बनाई और न ही केवल मंचों से भाषण देकर समाज को प्रभावित करने की कोशिश की। उनकी रणनीति यह रही कि पहले समाज का विश्वास जीता जाए, फिर उससे संवाद किया जाए और अंत में उसे भविष्य की दिशा दिखाई जाए।
कैंट विधानसभा क्षेत्र में वाल्मीकि समाज की सामाजिक स्थिति और राजनीतिक भूमिका हमेशा से चर्चा का विषय रही है। लेकिन पहली बार ऐसा देखा जा रहा है कि इस समाज के बीच कोई नेता इस स्तर तक अपनी पकड़ बना पा रहा है। यही वजह है कि अब यह कहा जाने लगा है कि डॉ. अनीस बेग वाल्मीकि समाज के दिलों में बस चुके हैं।
कुल मिलाकर कैंट विधानसभा क्षेत्र में डॉ. अनीस बेग की छवि अब केवल एक चिकित्सक या समाजसेवी की नहीं रही, बल्कि वह वाल्मीकि समाज और व्यापक दलित वर्ग के दुख-दर्द को समझने वाले नेता के रूप में उभर रहे हैं। सेवा, संवाद और विश्वास के सहारे उन्होंने इस समाज के दिलों में जगह बना ली है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आगामी विधानसभा चुनाव में डॉ. अनीस बेग को दलित समाज का बड़ा समर्थन मिल सकता है और इससे कैंट विधानसभा सीट के राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।





