पंजाब

देश की संस्कृति, प्रकृति, प्रगति और परिवर्तन का आधार है भारतीय शिक्षा दृष्टि

Share now

नीरज सिसौदिया, जालंधर

भारतीय शिक्षा दृष्टि मैकाले मानसिकता से बाहर लाती है!भारतीय शिक्षा दृष्टि ज्ञान, कौशल और संस्कृति का संतुलन है!यह आत्मनिर्भर भारत का आधार है!यह देश की संस्कृति प्रकृति, प्रगति और परिवर्तन का आधार है |यह जीने की कला है!यह ज्ञान से विकास और संस्कारो से समाज का निर्माण करती है!भारत का जीवन अध्यात्मिक प्रकृति का है और शिक्षा का आधार भी आध्यात्मिकता है!भारतीय शिक्षा दर्शन पंच कोष आधारित समग्र विकास जिसमे शरीर, प्राण,मन, बुद्धि, आत्मा हैं पर आधारित है!


‘भारतीय शिक्षा दृष्टि’शिक्षा के साथ अपने संस्कार देना ही है!यह दृष्टि अपनी संस्कृति, मूल्यों और राष्ट्र हित को ध्यान में रखकर शिक्षा व्यवस्था को आकार देना है। यह दृष्टि 2020 की नई शिक्षा नीति के अनुरूप, रटने के बजाय कौशल-आधारित, मूल्य-आधारित और समग्र विकास पर जोर देती है, जिसका उद्देश्य युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करते हुए एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है।नई व पुरानी पीढ़ी में संवाद और धीरे धीरे इस संवाद में समाज के प्रति दायित्व बोध, व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्रय के सद्गुण, मूल्य श्रद्धा, श्रम श्रद्धा, आत्मीयता और बुराइयों के आकर्षण से दूर रहने की प्रवृति का निर्माण करना भी शिक्षा का ही उद्देश्य है!शिक्षा के माध्यम से समाज की अगली पीढ़ी के जीवन निर्माण में धर्म का भी महत्वपूर्ण योगदान है क्योंकि उचित मूल्यों पर जीने का ढंग ही धर्म है |

मातृभाषा के बारे में स्वाभिमान उत्पन्न करने वाली शिक्षा चाहिये क्योंकि अपने रीति रिवाज़, अपनी संस्कृति से जुड़ कर ही सभ्य समाज की रचना हो सकती है!शिक्षा केवल पैसे कमाने वाली ही नहीं होनी चाहिये!भारतीय शिक्षा के वर्तमान प्रतिमान इन सब बातों को ध्यान में रख कर ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करें जो भारत को आत्मनिर्भर, सक्षम और समर्थ बनाते हुए वैभव संपन्न नए भारत के लक्ष्य को खुली आंखों से देख सके। यह शब्द डीएवी विश्वविद्यालय जालंधर के ऑडिटोरियम में बोलते हुए विद्या भारती के राष्ट्रीय महामंत्री देसराज जी ने कहे !इससे पहले विद्या भारती के अखिल भारतीय महामंत्री देसराज जी के पहुँचने पर कुलपति डॉ मनोज जी ने स्वागत किया!कार्यक्रम में डीएवी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ मनोज जी,विद्या भारती पंजाब के कोषाध्यक्ष विजय ठाकुर, विद्या भारती पंजाब के प्रांत संपर्क प्रमुख सुखदेव वशिष्ठ भी उपस्थित रहे!

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *