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महासचिव बनते ही राजकुमार पाल ने बरेली सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव को दिखाया ठेंगा, सपा की नई जिला टीम बनते ही शुरू हुआ ‘पावर गेम’, राजकुमार पाल ने अखिलेश-श्यामलाल पाल का जताया आभार लेकिन आभार संदेश में शुभलेश यादव का नहीं लिया नाम, पढ़ें क्या है पूरा माजरा?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

समाजवादी पार्टी में बरेली जिले की नई जिला कार्यकारिणी के गठन के साथ ही संगठन के भीतर सियासी हलचल तेज होने लगी है। 65 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी में राजकुमार पाल को जिला महासचिव की अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल का आभार जताया है। लेकिन इस पोस्ट में जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव का जिक्र तक नहीं होने से अब इसे लेकर पार्टी के अंदर और बाहर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राजकुमार पाल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि अखिलेश यादव और श्याम लाल पाल ने उन्हें नई जिम्मेदारी देकर जो विश्वास जताया है, उसके लिए वह आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने इसे सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए समाजवादी विचारधारा, पीडीए की एकता और संगठन को मजबूत करने के लिए काम करते रहने की बात कही। पोस्ट के अंत में उन्होंने अखिलेश यादव, श्याम लाल पाल और पीडीए एकता के समर्थन में नारे भी लिखे।
लेकिन सवाल यही है कि नई जिला कार्यकारिणी के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव का नाम इस आभार सूची से क्यों गायब रहा?
यह महज सोशल मीडिया पोस्ट में नाम छूट जाने का मामला है या इसके पीछे बरेली सपा में बनते नए शक्ति समीकरणों का संकेत छिपा है? फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर इसे लेकर चर्चाओं का दौर जरूर शुरू हो गया है।

राजकुमार पाल द्वारा फेसबुक पर की गई पोस्ट।

कार्यकारिणी के साथ ही सामने आएंगे नए शक्ति केंद्र?

बरेली सपा की राजनीति को समझने वालों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिला कार्यकारिणी के गठन से पहले ही महासचिव पद को लेकर पार्टी के भीतर काफी खींचतान की चर्चा थी। राजकुमार पाल समेत कई नाम इस पद के दावेदारों में शामिल बताए जा रहे थे। यहां तक कि कार्यकारिणी के गठन में देरी की एक बड़ी वजह महासचिव पद के दावेदारों के बीच संतुलन बनाने को माना जा रहा था।
अब राजकुमार पाल को जिला महासचिव की जिम्मेदारी मिल गई है। यानी वह सीधे जिला संगठन के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक पर पहुंच गए हैं। ऐसे में उनका सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष को धन्यवाद देना, लेकिन जिलाध्यक्ष को धन्यवाद नहीं देना राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, सिर्फ एक फेसबुक पोस्ट के आधार पर दोनों नेताओं के बीच टकराव या गुटबाजी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। यह भी संभव है कि पोस्ट लिखते समय राजकुमार पाल ने अपना आभार उन नेताओं तक सीमित रखा हो, जिनके नाम से उनका मनोनयन जुड़ा है। लेकिन राजनीति में सार्वजनिक संदेशों के मायने अक्सर शब्दों से ज्यादा उन नामों से तय होते हैं, जो लिए गए और जो नहीं लिए गए।

अखिलेश-श्यामलाल को धन्यवाद, शुभलेश को नहीं—क्या संदेश गया?

राजकुमार पाल की पोस्ट में दो स्तर साफ दिखाई देते हैं। पहला, उन्होंने अखिलेश यादव को ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ और ‘पीडीए जननायक’ के रूप में संबोधित किया। दूसरा, उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल का विशेष रूप से आभार जताया। इसके उलट जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव का कोई उल्लेख नहीं है। ऐसे समय में जब नई कार्यकारिणी की घोषणा के बाद जिला संगठन की कमान व्यावहारिक तौर पर शुभलेश यादव के हाथ में है, यह अंतर राजनीतिक विश्लेषण का विषय बनना स्वाभाविक है। लंबी कवायद के बाद उनकी अध्यक्षता में 65 सदस्यीय नई कार्यकारिणी घोषित हुई। इसमें 39 पदाधिकारी पिछड़े वर्ग से और 14 अल्पसंख्यक समाज से हैं। राजकुमार पाल को जिला महासचिव तथा अशोक यादव को जिला कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
यानी एक तरफ शुभलेश यादव संगठन के कप्तान हैं, तो दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी छोड़कर सपा में आए राजकुमार पाल को महासचिव बनाकर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में दोनों के बीच तालमेल आने वाले दिनों में बरेली सपा की कार्यशैली के लिए बेहद अहम होगा।

अब नई टीम की पहली परीक्षा

बरेली सपा के लिए संगठन का यह नया दौर इसलिए भी अहम है क्योंकि जनवरी 2026 में पार्टी की पूरी जिला कार्यकारिणी भंग कर दी गई थी। उस समय संगठन के भीतर गुटबाजी और अनुशासन से जुड़ी चर्चाओं ने भी जोर पकड़ा था। ऐसे में नई कार्यकारिणी का गठन केवल पद बांटने की कवायद नहीं है। इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करने की है। लेकिन यहां भी बगावत के सुर बुलंद होने लगे हैं। शुभलेश यादव का चौतरफा विरोध हो रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। टीम में किसी भी तेली समाज के नेता को अहम जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। एक भी जाटव को उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया जबकि यादव उपाध्यक्ष बड़ी तादाद में लिए गए हैं।
बरेली सपा में संगठनात्मक पदों की लड़ाई को केवल संगठन तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अलग-अलग सीटों पर टिकट के दावेदार लंबे समय से सक्रिय हैं। ऐसे में जिला संगठन में किस नेता की कितनी पकड़ है, यह आने वाले दिनों में टिकट की राजनीति और चुनावी प्रबंधन दोनों को प्रभावित कर सकता है।

एक पोस्ट से शुरू हुई चर्चा, आगे तस्वीर साफ होगी
बरेली सपा का पिछला दौर गुटबाजी और संगठनात्मक विवादों से अछूता नहीं रहा है। ऐसे में नई टीम के गठन के तुरंत बाद इस तरह की चर्चाएं पार्टी के लिए निश्चित तौर पर चिंता का विषय हो सकती हैं।
आखिरकार असली सवाल राजकुमार पाल की पोस्ट में शुभलेश यादव का नाम नहीं होने से ज्यादा बड़ा है कि क्या बरेली सपा की नई टीम में संगठन की कमान एक केंद्र में रहेगी या नई जिम्मेदारियों के साथ कई समानांतर शक्ति केंद्र भी उभरेंगे?
इसका जवाब आने वाले महीनों में जिला संगठन की बैठकों, कार्यक्रमों, नियुक्तियों और 2027 की चुनावी तैयारियों में दिखाई देगा। अभी इतना जरूर कहा जा सकता है कि बरेली सपा की नई कार्यकारिणी बनते ही संगठन के भीतर ‘पावर गेम’ की चर्चा ने दस्तक दे दी है।

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