नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर वर्ष 2027 के चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी के बीच वरिष्ठ पार्षद राजेश अग्रवाल की हालिया गतिविधियां सामाजिक संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर विष्णु इंटर कॉलेज में शिक्षकों का सम्मान करने के बाद वह कूर्मांचल नगर में पर्वतीय समाज की ओर से आयोजित 60वीं श्रीरामलीला में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इन दोनों कार्यक्रमों के जरिए उनकी मौजूदगी शिक्षा जगत और सांस्कृतिक संगठनों के बीच दिखाई दी है।

कैंट विधानसभा क्षेत्र में पर्वतीय समाज के करीब चार से पांच हजार मतदाता होने का अनुमान है। ऐसे में इस समाज के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन में राजेश अग्रवाल की भागीदारी को उनकी राजनीतिक दावेदारी के सामाजिक पहलू से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजेश अग्रवाल बरेली शहर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ पार्षद और बरेली विकास प्राधिकरण के सदस्य हैं। अब उनका नाम कैंट विधानसभा सीट से सपा के संभावित दावेदारों में शामिल है। ऐसे में उनकी हालिया गतिविधियां केवल सामाजिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह जातीं, बल्कि यह भी सामने लाती हैं कि वह अलग-अलग वर्गों और संगठनों के बीच अपनी सार्वजनिक मौजूदगी बनाए हुए हैं। हालांकि, किसी कार्यक्रम में भागीदारी को सीधे चुनावी समर्थन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

पर्वतीय समाज के बीच मौजूदगी है बेहद अहम
कूर्मांचल नगर में पर्वतीय समाज की ओर से आयोजित 60वीं श्रीरामलीला में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के बाद राजेश अग्रवाल ने समाज के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय समाज ने उन्हें हमेशा स्नेह और आशीर्वाद दिया है और वह इसके लिए हमेशा आभारी रहेंगे। यह बयान उनके और समाज के बीच संबंधों को रेखांकित करता है।

स्थानीय राजनीतिक आकलन के मुताबिक, बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र में पर्वतीय समाज के मतदाताओं की संख्या करीब चार से पांच हजार हो सकती है। यह आधिकारिक मतदाता आंकड़ा नहीं है, बल्कि अनुमान है। फिर भी, विधानसभा चुनाव के लिहाज से किसी सामाजिक समूह की यह संभावित संख्या चर्चा का विषय बन सकती है। खासकर तब, जब सीट पर मुकाबला कड़ा हो और प्रत्याशियों को अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की जरूरत हो।

कैंट सीट से सपा टिकट के अन्य दावेदारों की पर्वतीय समाज तक पहुंच को लेकर स्थानीय स्तर पर यह आकलन भी सामने आता है कि उनकी पहुंच अपेक्षाकृत सीमित है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और यह भी नहीं कहा जा सकता कि इस समाज का समर्थन किसी एक नेता के पक्ष में एकजुट है। पर्वतीय समाज के मतदाता भी दूसरे सामाजिक समूहों की तरह अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताएं रखते हैं। इसके बावजूद, इस समाज के आयोजन में राजेश अग्रवाल की मौजूदगी उनकी दावेदारी के सामाजिक पक्ष को चर्चा में लाती है।

रामलीला के मंच से सामाजिक संबंधों का संदेश
रामलीला जैसे आयोजन केवल धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होते, बल्कि स्थानीय स्तर पर विभिन्न समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाने का माध्यम भी बनते हैं। कूर्मांचल नगर में आयोजित रामलीला में राजेश अग्रवाल की भागीदारी इसी संदर्भ में देखी जा सकती है। उन्होंने पर्वतीय समाज से मिले स्नेह और आशीर्वाद का उल्लेख करते हुए उसके प्रति आभार व्यक्त किया।

राजनीतिक दृष्टि से ऐसे कार्यक्रमों में उपस्थिति का महत्व इस बात में है कि जनप्रतिनिधि और चुनावी दावेदार विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ संवाद का अवसर पाते हैं। हालांकि, किसी सांस्कृतिक मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना और उस समाज के मतदाताओं का समर्थन हासिल करना दो अलग-अलग बातें हैं। राजेश अग्रवाल के मामले में भी वास्तविक राजनीतिक असर का आकलन चुनाव के दौरान ही किया जा सकेगा, जब मतदाताओं की प्राथमिकताएं और समर्थन स्पष्ट होंगे।

शिक्षक सम्मान के जरिए शिक्षा जगत तक पहुंच
राजेश अग्रवाल ने विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर शहर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल विष्णु इंटर कॉलेज पहुंचकर शिक्षकों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कॉलेज के प्रबंधक सुधीर कुमार अग्रवाल और प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार का धन्यवाद किया। कार्यक्रम के संचालन में प्रवीण कुमार शर्मा और सर्वेश कुमार पांडे की भूमिका की भी सराहना की।

इससे पहले राजेश अग्रवाल शिक्षक सम्मान माह के तहत भी विभिन्न विद्यालयों में शिक्षकों को सम्मानित करने की पहल कर चुके हैं। उनके मुताबिक, शिक्षकों का समाज निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है और उनके सम्मान के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। विद्यालयों में पहुंचकर शिक्षकों से संवाद करना उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों का एक हिस्सा रहा है।

शिक्षा जगत से जुड़े कार्यक्रमों में भागीदारी का राजनीतिक महत्व भी है। शिक्षक और शिक्षण संस्थान स्थानीय समाज में प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। हालांकि, शिक्षकों के सम्मान के कार्यक्रम को किसी राजनीतिक समर्थन या चुनावी लाभ से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। इतना जरूर है कि इससे राजेश अग्रवाल की सार्वजनिक गतिविधियों में शिक्षा से जुड़े लोगों की मौजूदगी का पहलू सामने आता है।
राजेश अग्रवाल की दावेदारी के संदर्भ में उनके पार्षद के रूप में अनुभव, बरेली विकास प्राधिकरण से जुड़ाव और शहर विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी होने की पृष्ठभूमि महत्वपूर्ण है। शिक्षक सम्मान और पर्वतीय समाज की रामलीला में भागीदारी उनकी हालिया सार्वजनिक गतिविधियों को सामने लाती है। हालांकि, इन गतिविधियों के आधार पर उनकी चुनावी स्थिति या टिकट मिलने की संभावना के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।




