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बरेली में हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक इजीनियर अनीस अहमद खां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गुजारिश- स्वामी अविमुक्तेशवरानंद सरस्वती के अपमान के लिए सरकार को मांगनी चाहिए माफी, पढ़ें क्या कहा समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष ने?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। उनके साथ प्रयागराज में हुए कथित व्यवहार को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में बयान दिए हैं। उनका कहना है कि प्रयागराज प्रशासन द्वारा शंकराचार्य के साथ किया गया व्यवहार निंदनीय है और इसके लिए सरकार को माफी मांगनी चाहिए।

इसी कड़ी में समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष इंजीनियर अनीस अहमद खां ने भी मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश सरकार से माफी मांगने की अपील की है। बता दें कि इंजीनियर अनीस अहमद खां बरेली में हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल के तौर पर जाने जाते हैं। उनका अपना घर इसकी मिसाल पेश करता है जहां एक ही छत के नीचे गीता और कुरान दोनों पढ़ी जाती हैं। उनके अपने घर में मुस्लिम भी रहते हैं और हिन्दू भी।

उन्होंने कहा कि वह पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर देख रहे हैं कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को रोका गया। उनके साथ चल रहे अनुयायियों को पैदल चलने के लिए कहा गया और कथित रूप से उनके साथ अभद्रता भी की गई।

इंजीनियर अनीस अहमद खां ने बताया कि जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस व्यवहार के विरोध में धरने पर बैठे, तो उन्हें नोटिस थमा दिया गया। उन्होंने कहा कि माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन में इस तरह का आचरण ठीक नहीं है। किसी भी धर्मगुरु के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल अनुचित है, बल्कि इससे आम लोगों की भावनाएं भी आहत होती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से राजनीति का स्तर गिरा है। पहले हिंदू-मुस्लिम की राजनीति की गई, फिर ब्राह्मणों के साथ अन्याय होने लगा और अब धर्मगुरुओं के साथ भी गलत व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना था कि शंकराचार्य का पद कोई साधारण पद नहीं है। यह पद किसी नेता द्वारा नहीं दिया जाता, बल्कि यह वर्षों की साधना, तपस्या और गुरु परंपरा से मिलता है।

इंजीनियर अनीस अहमद खां ने कहा कि शंकराचार्य वही बन सकता है जिसे वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों का गहरा ज्ञान हो, जो सांसारिक मोह-माया से दूर हो और जिसने कठोर तपस्या की हो। ऐसे व्यक्ति को गुरु द्वारा उत्तराधिकारी बनाया जाता है। इस सर्वोच्च धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति को नोटिस देना और उनके साथ इस तरह का व्यवहार करना यह दिखाता है कि सरकार दबाव की राजनीति कर रही है।

उन्होंने कहा कि इस घटना से हिंदू समाज के लोग भी दुखी हैं। अपने शंकराचार्य के अपमान से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था से जुड़ा हुआ है। जब किसी बड़े धर्मगुरु का सार्वजनिक रूप से अपमान होता है, तो उससे समाज में गलत संदेश जाता है।

इंजीनियर अनीस अहमद खां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में सरकार को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस घटना से न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लोगों को ठेस पहुंची है। सरकार को चाहिए कि वह धर्मगुरुओं का सम्मान करे और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए उचित कदम उठाए।

उन्होंने यह भी कहा कि धर्मगुरु चाहे किसी भी धर्म के हों, उनका सम्मान करना सभी का कर्तव्य है। किसी भी धार्मिक व्यक्ति का अपमान समाज में तनाव पैदा कर सकता है। इसलिए सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना चाहिए।

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