नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी में जिला अध्यक्ष पद को लेकर सियासत तेज हो गई है। पार्टी के बरेली महानगर सचिव महेंद्र सिंह लोधी राजपूत का नाम अब केवल एक दावेदार के रूप में नहीं, बल्कि लोधी समाज की सामूहिक मांग के रूप में सामने आ रहा है। लोधी समाज से जुड़े कई संगठनों ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को पत्र लिखकर साफ शब्दों में मांग की है कि जिला अध्यक्ष पद पर लोधी समाज से महेंद्र सिंह लोधी को जिम्मेदारी दी जाए। इसके बाद महेंद्र सिंह लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पहुंचे और लोधी समाज की आवाज को पुरजोर तरीके से हाईकमान तक पहुंचाया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल और सपा सांसद रामजी लाल सुमन से भी मुलाकात की।
लोधी संगठनों का कहना है कि महेंद्र सिंह लोधी संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। पत्र में यह भी लिखा गया है कि पार्टी को अब ऐसे नेता को आगे लाना चाहिए, जो सिर्फ पद का इच्छुक न हो, बल्कि संगठन को खड़ा करने की क्षमता रखता हो।

लोधी समाज के संगठनों ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि बरेली जिले में आज तक कभी भी लोधी समाज से किसी नेता को जिला अध्यक्ष नहीं बनाया गया। ऐसे में अगर इस बार भी लोधी समाज को नजरअंदाज किया गया, तो यह सामाजिक संतुलन के सिद्धांत के खिलाफ होगा।
समाज के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक पद की बात नहीं है, बल्कि सम्मान और हिस्सेदारी की लड़ाई है। लोधी समाज का मानना है कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय की राजनीति करती है, तो फिर संगठन में भी सभी समाजों को बराबरी का मौका मिलना चाहिए।
महेंद्र सिंह लोधी राजपूत वर्तमान में समाजवादी पार्टी के महानगर सचिव हैं। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है जो केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आंदोलनों, जनसंपर्क और संगठन विस्तार में लगातार सक्रिय रहता है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम करते रहे हैं। पार्टी के भीतर उन्हें ऐसा नेता माना जाता है, जो आदेश नहीं देता बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होकर काम करता है।
युवाओं का भरोसा, संगठन की उम्मीद
महेंद्र सिंह लोधी को युवा कार्यकर्ताओं का चेहरा भी माना जा रहा है। युवा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे उनकी बात सुनते हैं और उन्हें नेतृत्व तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि युवाओं के बीच उनकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि पार्टी किसी युवा और सक्रिय नेता को जिला अध्यक्ष बनाती है, तो यह सिर्फ पद भरने का फैसला नहीं होगा, बल्कि संगठन को नई दिशा देने का कदम होगा।

वोट बैंक और रणनीति का सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बरेली जिले में लोधी समाज की संख्या अच्छी खासी है और कई विधानसभा क्षेत्रों में यह समाज चुनावी परिणामों को प्रभावित करता है। ऐसे में यदि पार्टी लोधी समाज से किसी नेता को जिला अध्यक्ष बनाती है, तो इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
लोधी संगठनों का कहना है कि समाजवादी पार्टी को लोधी समाज ने हर दौर में समर्थन दिया है, लेकिन संगठन में उसे अब तक नेतृत्व नहीं मिला। उनका मानना है कि अब समय आ गया है जब समर्थन का सम्मान प्रतिनिधित्व के रूप में दिया जाए।
सामाजिक संतुलन की अग्निपरीक्षा
पार्टी के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक संतुलन बनाए रखने की है। अलग-अलग समाजों और वर्गों को साथ लेकर चलना ही किसी भी पार्टी की ताकत होती है।
यदि महेंद्र सिंह लोधी को जिला अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह फैसला सामाजिक संतुलन की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा। इससे यह संदेश जाएगा कि पार्टी सिर्फ नारों में नहीं, बल्कि संगठन में भी सामाजिक न्याय लागू करना चाहती है।
संसद सत्र खत्म होते ही आ सकता है फैसला
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संसद का सत्र 13 तारीख को समाप्त हो रहा है और उसके तुरंत बाद समाजवादी पार्टी संगठन को लेकर बड़े फैसले कर सकती है। माना जा रहा है कि संसद सत्र खत्म होते ही नए जिला अध्यक्ष की घोषणा की जा सकती है।
इसी वजह से जिला अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। दावेदारों के साथ-साथ समाजों की नजर भी अब पार्टी नेतृत्व पर टिक गई है।
अब तक बरेली जिले में जिला अध्यक्ष पद पर कई समाजों से नेता बनाए गए हैं, लेकिन लोधी समाज को यह मौका नहीं मिला। यही कारण है कि इस बार यह मामला केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बन गया है।
लोधी समाज के लोगों का कहना है कि यदि महेंद्र सिंह लोधी को जिला अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह बरेली की राजनीति में नया अध्याय जोड़ेगा। इससे यह साबित होगा कि मेहनत, संगठन और समाज के समर्थन से भी बड़ा पद पाया जा सकता है।
फिलहाल समाजवादी पार्टी में जिला अध्यक्ष पद को लेकर मंथन जारी है। पार्टी नेतृत्व सभी दावेदारों पर विचार कर रहा है। लेकिन इतना साफ है कि लोधी संगठनों के समर्थन और समाज की एकजुट मांग ने महेंद्र सिंह लोधी की दावेदारी को सियासी वजन दे दिया है।
अगर उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती है, तो यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति को पद देने का नहीं होगा, बल्कि लोधी समाज को राजनीतिक पहचान देने का फैसला माना जाएगा।
अब सबकी निगाहें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं।
संसद सत्र के बाद होने वाला यह फैसला तय करेगा कि बरेली की राजनीति में इतिहास बनेगा या मौका फिर टल जाएगा।





