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कोरोना से लेकर अब तक सेवा जारी, मम्मा का स्वास्थ्य अभियान फिर चर्चा में, स्वास्थ्य शिविर से बुजुर्गों को मिला सहारा

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नीरज सिसौदिया, बरेली
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पार्षद और शहर विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा ने बुधवार को अपने निवास कार्यालय पर एक बड़ा स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर लोगों को राहत पहुंचाने की कोशिश की। इस शिविर में खास तौर पर सत्तर वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के टीकाकरण, आयुष्मान कार्ड बनवाने और आभा कार्ड तैयार करने की व्यवस्था की गई थी। सुबह से ही इलाके के बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों की भीड़ वहां पहुंचने लगी और पूरे दिन शिविर में जांच, पंजीकरण और परामर्श का काम चलता रहा।
इस मौके पर सतीश चंद्र कातिब मम्मा स्वयं पूरे समय मौजूद रहे और आने वाले लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि समाज के बुजुर्गों और गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से मिलें, यह उनकी प्राथमिकता है। उनका मानना है कि सरकारी योजनाएं तभी सफल होंगी जब उन्हें सीधे लोगों तक पहुंचाया जाए और इसी उद्देश्य से ऐसे शिविर लगातार लगाए जा रहे हैं।
शिविर में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारी भी मौजूद रहे, जिनमें धर्मेंद्र सिंह, एएनएम रुचि शर्मा और आशा कार्यकर्ता प्रेम लता सहित अन्य सहयोगियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इन सभी ने मिलकर बुजुर्गों का पंजीकरण कराया, आवश्यक दस्तावेज जांचे और जिन लोगों के कार्ड नहीं बने थे उनके कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी कराई। कई लोगों को मौके पर ही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और योजनाओं का लाभ लेने का तरीका भी समझाया गया।
स्थानीय लोगों का कहना था कि इस तरह के शिविर से उन्हें काफी सुविधा मिली क्योंकि सामान्य दिनों में अस्पताल या दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि यहां एक ही स्थान पर सभी काम हो गए। खासकर बुजुर्गों ने राहत महसूस की क्योंकि लंबी कतारों और यात्रा की परेशानी से उन्हें छुटकारा मिला। कई परिवार अपने बुजुर्ग माता-पिता को लेकर पहुंचे और उन्होंने पार्षद तथा टीम का धन्यवाद भी किया।
सतीश चंद्र कातिब मम्मा पिछले काफी समय से इलाके में लगातार स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते रहे हैं। उनका प्रयास रहा है कि राजनीति केवल चुनाव तक सीमित न रहे, बल्कि सामाजिक सेवा के जरिए लोगों से जुड़ाव बना रहे। स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने समय-समय पर मुफ्त जांच शिविर, दवा वितरण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान भी चलाए हैं, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों को लाभ मिला है।
कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी उनका यह सेवा अभियान नहीं रुका था। उस समय जब लोग घरों से निकलने से डर रहे थे, तब उन्होंने अपने तत्कालीन पार्षद साथी आरेंद्र अरोड़ा कुक्की के साथ मिलकर कोरोना जांच शिविर लगाए थे। उस दौरान दोनों ने दिन-रात लोगों की मदद की और संक्रमित मरीजों को समय पर जांच तथा इलाज की सुविधा दिलाने का प्रयास किया। इस सेवा कार्य के दौरान सतीश चंद्र स्वयं भी कोरोना संक्रमित हो गए थे, लेकिन ठीक होने के बाद उन्होंने फिर से मैदान में उतरकर शिविर लगाना शुरू कर दिया था।
महामारी के बाद उन्होंने कोरोना टीकाकरण शिविर भी आयोजित कराए, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को टीका लग सका। उनके करीबी बताते हैं कि उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि का असली काम संकट के समय लोगों के साथ खड़ा होना होता है। यही वजह है कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अपनी सामाजिक गतिविधियों का मुख्य हिस्सा बना रखा है।
आरेंद्र अरोड़ा कुक्की अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोग आज भी उनके और मम्मा के साथ किए गए सेवा कार्यों को याद करते हैं। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि महामारी के समय दोनों नेताओं ने बिना किसी डर के घर-घर मदद पहुंचाई थी। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब भी स्वास्थ्य शिविरों का सिलसिला जारी है।
राजनीतिक नजरिए से भी इस तरह के कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शहर विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं और सतीश चंद्र कातिब मम्मा को टिकट का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने इस पर सीधी टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनका पहला लक्ष्य जनता की सेवा है और वे आगे भी इसी तरह सामाजिक कार्य करते रहेंगे।
कुल मिलाकर, बुधवार को लगा यह स्वास्थ्य शिविर न केवल सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बना, बल्कि इससे यह संदेश भी गया कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय प्रयासों से स्वास्थ्य सुविधाओं को आम जनता के करीब लाया जा सकता है। इलाके के लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे शिविर नियमित रूप से लगाए जाते रहेंगे ताकि जरूरतमंदों को समय पर मदद मिलती रहे।

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