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जमीन पर पकड़, आंकड़ों पर काम, पहले एसआईआर, फिर पीडीए गणना और अब बूथ की मजबूती से जीत का रास्ता तलाश रहे इंजीनियर अनीस अहमद खां, रोड शो से लेकर पदयात्रा तक, जानिये क्या है बरेली कैंट विधानसभा सीट से सपा के टिकट के प्रबल दावेदार इंजीनियर अनीस अहमद खां की अगली रणनीति?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
पुरानी कहावत है कि जो लोग बिना शोर-शराबे के मेहनत करते हैं, उनकी कामयाबी एक दिन खुद ही बोलती है। कुछ ऐसा ही रास्ता इन दिनों समाजवादी पार्टी के नेता इंजीनियर अनीस अहमद खां अपनाते नजर आ रहे हैं। वे पार्टी की अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और बरेली कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार भी। खास बात यह है कि वह भीड़ और दिखावे की राजनीति से दूर रहकर, चुपचाप संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि इंजीनियर अनीस अहमद खां इस बार ‘रामपुर फॉर्मूला’ पर काम कर रहे हैं। यानी वही रणनीति, जिसने पिछले लोकसभा चुनाव में रामपुर जैसी मुश्किल सीट पर पार्टी को जीत दिलाई थी, अब बरेली कैंट में लागू करने की तैयारी है।
दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें रामपुर विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया गया था। रामपुर की सीट आसान नहीं थी। वहां कई तरह की राजनीतिक चुनौतियां थीं और माहौल भी पूरी तरह अनुकूल नहीं था। लेकिन अनीस अहमद ने बिना शोर किए, एक सोची-समझी रणनीति पर काम किया। नतीजा यह हुआ कि पहली बार चुनाव लड़ रहे सपा उम्मीदवार मोहिबुल्लाह नदवी ने जीत दर्ज कर ली। इस जीत ने सभी को चौंका दिया, क्योंकि इसकी उम्मीद बहुत कम लोग कर रहे थे।
इस सफलता के बाद पार्टी नेतृत्व ने भी अनीस अहमद के काम की सराहना की। इसके बाद उन्होंने तुरंत बरेली कैंट विधानसभा सीट पर ध्यान केंद्रित कर दिया। उन्हें यह अच्छी तरह समझ में आ गया था कि 2027 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के लिए बेहद अहम होगा। ऐसे में पार्टी उसी नेता को आगे बढ़ाएगी, जो जमीन पर काम करके संगठन को मजबूत करेगा।
लोकसभा चुनाव के बाद से ही अनीस अहमद खां ने अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए काम शुरू कर दिया। सबसे पहले उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को मजबूत करने पर ध्यान दिया। इसके लिए उन्होंने कई बैठकें और सम्मेलन आयोजित किए, ताकि इन वर्गों को एक मंच पर लाया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने वोटों का गणित सुधारने पर भी खास ध्यान दिया। आमतौर पर नेता चुनाव के नजदीक आने पर मतदाता सूची पर काम करते हैं, लेकिन अनीस अहमद ने इससे पहले ही इस दिशा में काम शुरू कर दिया था। बाद में जब एसआईआर (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया शुरू हुई, तो यह काम और चुनौतीपूर्ण हो गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और संगठन से अलग हटकर व्यक्तिगत स्तर पर भी इस काम को पूरी जिम्मेदारी से किया।
उन्होंने यह रास्ता नहीं चुना कि बड़े-बड़े कार्यक्रम करके अपनी छवि बनाई जाए, बल्कि उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करना बेहतर समझा। दिन-रात मेहनत करके उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े काम को आगे बढ़ाया। उनकी इसी सक्रियता को देखते हुए पार्टी हाईकमान ने उन्हें बरेली कैंट विधानसभा के करीब 100 बूथों की जिम्मेदारी सौंप दी।
इसके बाद उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का काम शुरू किया। बूथ कमेटियां बनाई गईं और बीएलए (Booth Level Agents) नियुक्त किए गए। यह काम किसी भी चुनाव में बहुत अहम माना जाता है, क्योंकि बूथ ही चुनाव जीतने की असली कुंजी होते हैं।
इस दौरान अनीस अहमद खां ने करीब 38 हजार से ज्यादा मतदाताओं के एसआईआर फॉर्म भरवाने और अपलोड कराने का काम किया। साथ ही नए वोट बनवाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इस पूरे काम की विस्तृत रिपोर्ट उन्होंने पार्टी नेतृत्व को सौंपी।
संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ वह पार्टी के हर कार्यक्रम में भी सक्रिय नजर आए। चाहे कोई बैठक हो या सार्वजनिक कार्यक्रम, उन्होंने हर जगह अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल बनाए रखा।
इसके अलावा एक और अहम काम था—पीडीए का सही आकलन करना। इसके लिए अनीस अहमद ने व्यक्तिगत स्तर पर एक एजेंसी के जरिए सर्वे कराया। इस सर्वे में इलाके की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का पूरा आंकलन किया गया। इसकी रिपोर्ट भी उन्होंने पार्टी नेतृत्व को सौंप दी, ताकि रणनीति बनाने में आसानी हो सके।
फिर रमजान का महीना आया, तो उन्होंने इफ्तार पार्टियों के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाया। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि इसके जरिए उन्होंने समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़ने की कोशिश की और अपने जनसंपर्क को मजबूत किया।
अब जब संगठन को काफी हद तक मजबूत कर लिया गया है, तो अनीस अहमद खां चुनावी प्रचार को तेज करने की तैयारी में हैं। उनकी योजना में नुक्कड़ सभाएं, पीडीए सम्मेलन, पदयात्राएं और रोड शो शामिल हैं। इसके साथ ही पोस्टर और प्रचार सामग्री के जरिए भी माहौल बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
यही नहीं, आने वाले समय में कुछ बड़े नेताओं के कार्यक्रम कराने की भी तैयारी की जा रही है। इसका मकसद पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरना और चुनावी माहौल को और मजबूत करना है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो इंजीनियर अनीस अहमद खां इस बार किसी जल्दबाजी या दिखावे के बजाय एक ठोस और संतुलित रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनका पूरा फोकस संगठन को मजबूत करने, वोटों का सही गणित बैठाने और हर वर्ग तक पहुंच बनाने पर है।
अगर उनकी यह रणनीति उसी तरह काम करती है, जैसे रामपुर में की थी, तो बरेली कैंट विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। फिलहाल, वह बिना शोर किए अपनी तैयारी में जुटे हैं और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।

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