यूपी

आदमी के बीच दीवारों का हो गया है जमाना

जमाना झूठे हक़दारों का हो गया है। आदमी के बीच दीवारों का हो गया है।। पहले मारते और फिर करते हैं आगाह। अब जमाना ऐसे ख़बरदारों का हो गया है।। हर बात में देखते हैं मतलब पहले अपना। यह जमाना ऐसे समझदारों का हो गया है।। चोर चोर मौसेरे भाई वाले बन गए लोग। अब […]

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एसके कपूर की गजलें – नजर-नजर…

नज़र नज़र में यही इक सवाल होता है। पराये दर्द का क्यों कर मलाल होता है।। निभाये उससे भला कैसे दोस्ती कोई। कि जिसके लहजे में अक्सर उबाल होता है।। बुलंदियाँ तो सभी को मिला नहीं करतीं। कभी कभी ही किसी से कमाल होता है।। किसी को आँख दिखाने से पहले यह सोचो। लहू का […]

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एसके कपूर की गजलें-2 – आंसू का भी दर्द…

आँसू का भी दर्द छुपाना पड़ता है। गम को पीकर भी मुस्काना पड़ता है।। लोग तमाशा कर देते हैं ज़ख़्मों का। खिलता चेहरा सबको दिखाना पड़ता है।। मजबूरी में गैरों को भी पास कभी। इच्छा के विपरीत बुलाना पड़ता है।। नोन लिये फिरती है हाथों में दुनिया। छिप कर हमको अश्क बहाना पड़ता है।। दुनिया […]

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एस के कपूर की गजलें-1, दुनिया से बेवफ़ा हो जाना जरूरी नहीं…

दिल को चोट पहुंचाना जरूरी नहीं। यूं आशियाना जलाना जरूरी नहीं।। अच्छा नहीं गम में गुमराह होना। दर्द हर किसी को सुनाना जरूरी नहीं।। जिंदगी से दोस्ती निभाओ मौत आने तक। यूं खामोशी में डूब जाना जरूरी नहीं।। यह दुनिया बाग है बागवां बनो तुम। यूँ कलेजा चीरकर घुमाना जरूरी नहीं।। “श्रीहंस” हंस कर मुकम्मल […]