विचार

नींद चैन की आए कैसे

हाय यहाँ पर हमने देखे, गेहूँ के संग घुन पिसते और दलालों के कारण, भोले- भाले चप्पल घिसते। नींद चैन की आए कैसे, सपनों की खटिया टूटी बनता कोई काम न उनका, लगता है किस्मत रूठी बात नहीं करते अधिकारी, जो हैं यहाँ ऑन ड्यूटी और कर्मचारी भी क्यों अब, कसमें खाते हैं झूठी काली […]

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ऑक्सीजन बिना वे तड़पकर मरें

कोठियों ने उजाड़े यहाँ घोंसले, हाय पक्षी बसेरा कहाँ पर करें पेड़ काटे गए आज इतने अधिक, ऑक्सीजन बिना वे तड़पकर मरें। ऐंठ मेंआज मानव भरा खूब है, क्यों मलिन कर रहा हाय पर्यावरण रेडियोधर्मिता बढ़ गयी है यहाँ, भूत अब वायरस का करे जागरण लोग उल्लू यहाँ अब बनाने लगे, इसलिए सामने आ रहा […]

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कितनी पीड़ा अब देखो, तीमारदार सहते हैं…

कितनी पीड़ा अब देखो, तीमारदार सहते हैं दुत्कारा जाता जिनको, आँसू पीकर रहते हैं । बेबस मरीज की आहें, बेरहम नहीं हैं सुनते दौलत का खेल चल रहा, ताने-बाने वे बुनते बीमार भले मर जाए, वे अपना मतलब चुनते उनके कारण कितने ही, देखे अपना सिर धुनते घर में मर जाना अच्छा, कुछ लोग यही […]

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अब कुएं के मेंढकों में भी बढ़ी उत्तेजना

अब कुएँ के मेंढकों में भी बढ़ी उत्तेजना सभी तुकबंदी करेंगे बन गयी यह योजना। एक को दादा बनाया जो कि कवियों से जला और फिर तो तिकड़मों का चला ऐसा सिलसिला माफिया का साथ पाकर उन्होंने सबको छला हुई कवि की पलक गीली उठे आँसू छलछला नहीं कोई साथ देगा, भाव यह मन में […]