विचार

या रब क्यों इतने…

या रब क्यों इतने निष्ठुर हो जो न तेरा मान धरें क्यों उनके लिए छिपे बैठे हो आ जाओ उनके लिए बस जो तेरे लिए समर्पित हैं तुम तो जानों ये बेटी तेरी अब भी कितनी तटस्थ खड़ी सारा जग मायूस खड़ा है पर ये बेटी तेरी अडिग बड़ी तुझसे अटूट जो आस जुड़ी रख […]

इंटरव्यू

अधिकारों की लड़ाई अकेली लड़ती एक सिपाही, मिलिये प्रमिला सक्सेना से…

नीरज सिसौदिया, बरेली जिंदगी ने हर कदम पर उसकी अग्निपरीक्षा ली पर उसने भी हिम्मत नहीं हारी. वह महज 17 साल की थी जब बॉम्ब ब्लास्ट में उसने अपने माता-पिता और एक भाई को हमेशा के लिए खो दिया था. 17 साल की उस बेबस मासूम के सिर पर छोटे भाई की जिम्मेदारी का बोझ […]