यूपी

विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस (8 जून) पर विशेष, लगातार सिरदर्द रहे या…

विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस (8 जून) पर लगातार सिरदर्द रहे या, कभी अचानक चक्कर आए बढ़े चिड़चिड़ापन तो सम्भव, प्रकट ब्रेन ट्यूमर हो जाए। यह दिमाग के किसी भाग में, धीमे या तेजी से छाता हो सी.टी. स्कैन नहीं तो एम. आर. आई. भेद बताता किसी विषय पर बात करें तो,हो विचार में आनाकानी सुनने […]

विचार

न मानी कभी बात माँ- बाप की

कहानी बनी आज संताप की, कड़ी अब जुड़ी वार्तालाप की न मानी कभी बात माँ-बाप की, चलें आज गठरी लिए पाप की। भरी ऐंठ इतनी न कुछ भी सुना, कहा कुछ किसी ने उसी को धुना लड़ी आँख जिससे उसे ही चुना, मगर प्यार का जाल ऐसा बुना बने फिर कहीं वह कभी आपकी, रखी […]

विचार

तिकड़मों के बिना हैसियत थी कहां…

हाय मतलब यहाँ सिद्ध जिसका हुआ, आज घोड़े वही बेचकर सो रहा और उल्लू बनाया गया हो जिसे, बैठकर बेबसी में बहुत रो रहा। आदमी का न कोई भरोसा रहा, क्या पता कौन कब खोपड़ी फोड़ दे और पीड़ित न पैसा करे खर्च तो, फिर पुलिस भी उसे अब नया मोड़ दे हाय घटना बदलकर […]

झारखण्ड

पता नहीं कब मौत यहां पर…

नासमझी है उन लोगों की, जो औकात आज हैं भूले पता नहीं कब मौत यहाँ पर,चुपके से आ किसको छू ले। जिनके पेट भरे हैं वे क्यों, निर्बल के धन को भी हड़पें भूख- प्यास से जो अब तड़पें, उनसे होती रहतीं झड़पें सुख- सुविधा को भोग रहे जो, बेरहमी से करें कमाई दीन- दु:खी […]

विचार

पात्रता को न कोई यहां पूछता…

माल भेजा गया था किसी के लिए, हाय कुछ लोग मिल बाँट कर खा गए पात्रता को न कोई यहाँ पूछता, तिकड़मों से वही आज फिर छा गए। योजनाएँ बहुत भ्रष्ट होती रहीं, और जल की तरह खूब पैसा बहा निर्बलों का न इससे भला कुछ हुआ, जानकर भी किसी ने नहीं कुछ कहा दिख […]

विचार

प्यार के दीप जलकर भला क्या करें…

कब कहाँ कौन है अब सुरक्षित यहाँ, लोग घर से निकलते हुए भी डरें हाय नफरत उगलती रही आग जब, प्यार के दीप जलकर भला क्या करें। बढ़ गयी है बहुत लालसा की तपन, और इंसानियत हो गयी अब दफन कूटनीतिक व्यवस्था हुई बेरहम, जो मरा आज उसका चुरा है कफन लोग संवेदना बेचकर खा […]

विचार

कितनी पीड़ा अब देखो, तीमारदार सहते हैं…

कितनी पीड़ा अब देखो, तीमारदार सहते हैं दुत्कारा जाता जिनको, आँसू पीकर रहते हैं । बेबस मरीज की आहें, बेरहम नहीं हैं सुनते दौलत का खेल चल रहा, ताने-बाने वे बुनते बीमार भले मर जाए, वे अपना मतलब चुनते उनके कारण कितने ही, देखे अपना सिर धुनते घर में मर जाना अच्छा, कुछ लोग यही […]

विचार

साहित्य की बात : राजस्थान तक के स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं बरेली के इस साहित्यकार की रचनाएं, आर्थिक संकट के चलते प्रकाशित नहीं हो सका कहानी संग्रह

बहुआयामी प्रतिभा के धनी ‘कुमुद’ जी हिंदी साहित्य के सच्चे साधक थे जिन्होंने हिंदी जगत को पद्य एवं गद्य के क्षेत्र में अनुपम सौगात दी। किसी साहित्यकार का व्यक्तित्व उसकी साहित्यिक रचनाओं में ही विद्यमान रहता है। ‘कुमुद’ जी ने भारतीय जीवन के विविध पक्षों को लेकर साहित्य रचना की है। वह अपनी रचनाओं के […]