विचार

दीनदयाल उपाध्याय जी को हम भुला न पाएं…

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती (25 सितंबर) पर विशेष  दिखा गए जो मार्ग यहाँ वे, उसको सब अपनाएँ दीनदयाल उपाध्याय जी को हम भुला न पाएँ। सन् उन्निस सौ सोलह में पच्चीस सितंबर आई नगला चंद्रभान मथुरा में, खुशियाँ गईं मनाई पिता भगवती प्रसाद जी माता बनीं राम प्यारी उठा पिता का साया फिर […]

विचार

जनता की सेवा से क्या लेना- देना…

जो तिकड़म के ताऊ हैं वे आज भला, गली- गली की खाक यहाँ क्यों छानेंगे जनता की सेवा से क्या लेना- देना, अपना उल्लू सीधा करके मानेंगे। इधर खूब सत्ता से जुड़े लोग हैं तो, उधर घूमते हैं लाचार और निर्बल सदा ‘न्याय तक पहुँच’ योजना चलती है, नहीं समस्या का निकला फिर भी तो […]

विचार

लोकतंत्र की उड़ी धज्जियां…

किसने जहर उड़ेला बोलो, अपनी ही संतान में लोकतंत्र की उड़ी धज्जियाँ, क्यों अफगानिस्तान में। माताएँ- बहनें उत्पीड़ित, होती हैं अब खूब वहाँ सिसक रही हैं वे बेचारी, जाएँ भी तो भला कहाँ पहुँच न पाएँ आज उस जगह, अपनापन अब मिले जहाँ उनकी बदहाली की सुनकर, लोग हुए नाराज यहाँ जो संवेदनहीन हो गए, […]

यूपी

काला धन भी उजला होकर डोलेगा

अपनेपन का नाटक करने वालों का, कच्चा चिट्ठा कौन भला अब खोलेगा मानवता की सेवा में चतुराई से, काला धन भी उजला होकर डोलेगा। जनहित की बातों का तो अब क्या कहना, झूठे वादों में फँसकर पीड़ा सहना बनीं योजनाएँ जाने किसके हित में, निर्बल को तो बस आँसू पीकर रहना समरसता में भेद-भाव जब […]

विचार

आज माफिया की चलती है

पता नहीं है कौन कहाँ पर, हाय मवाली अब कहलाए आज माफिया की चलती है, जो सज्जन का दिल दहलाए। हुई व्यवस्था ध्वस्त यहाँ पर, सत्ता का मुँह भला क्यों सिला बनकर क्यों मौसेरा भाई, चोर- चोर से खूब अब मिला फँसा मुचलका पाबंदी में, सद्भावों को जो सहलाए आज माफिया की चलती है, जो […]

यूपी

विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस (8 जून) पर विशेष, लगातार सिरदर्द रहे या…

विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस (8 जून) पर लगातार सिरदर्द रहे या, कभी अचानक चक्कर आए बढ़े चिड़चिड़ापन तो सम्भव, प्रकट ब्रेन ट्यूमर हो जाए। यह दिमाग के किसी भाग में, धीमे या तेजी से छाता हो सी.टी. स्कैन नहीं तो एम. आर. आई. भेद बताता किसी विषय पर बात करें तो,हो विचार में आनाकानी सुनने […]

विचार

न मानी कभी बात माँ- बाप की

कहानी बनी आज संताप की, कड़ी अब जुड़ी वार्तालाप की न मानी कभी बात माँ-बाप की, चलें आज गठरी लिए पाप की। भरी ऐंठ इतनी न कुछ भी सुना, कहा कुछ किसी ने उसी को धुना लड़ी आँख जिससे उसे ही चुना, मगर प्यार का जाल ऐसा बुना बने फिर कहीं वह कभी आपकी, रखी […]

विचार

तिकड़मों के बिना हैसियत थी कहां…

हाय मतलब यहाँ सिद्ध जिसका हुआ, आज घोड़े वही बेचकर सो रहा और उल्लू बनाया गया हो जिसे, बैठकर बेबसी में बहुत रो रहा। आदमी का न कोई भरोसा रहा, क्या पता कौन कब खोपड़ी फोड़ दे और पीड़ित न पैसा करे खर्च तो, फिर पुलिस भी उसे अब नया मोड़ दे हाय घटना बदलकर […]

झारखण्ड

पता नहीं कब मौत यहां पर…

नासमझी है उन लोगों की, जो औकात आज हैं भूले पता नहीं कब मौत यहाँ पर,चुपके से आ किसको छू ले। जिनके पेट भरे हैं वे क्यों, निर्बल के धन को भी हड़पें भूख- प्यास से जो अब तड़पें, उनसे होती रहतीं झड़पें सुख- सुविधा को भोग रहे जो, बेरहमी से करें कमाई दीन- दु:खी […]

विचार

पात्रता को न कोई यहां पूछता…

माल भेजा गया था किसी के लिए, हाय कुछ लोग मिल बाँट कर खा गए पात्रता को न कोई यहाँ पूछता, तिकड़मों से वही आज फिर छा गए। योजनाएँ बहुत भ्रष्ट होती रहीं, और जल की तरह खूब पैसा बहा निर्बलों का न इससे भला कुछ हुआ, जानकर भी किसी ने नहीं कुछ कहा दिख […]