इंटरव्यू

सपा ने जाटवों और धोबी समाज को मौका दिया, एक मौका वाल्मीकि समाज को भी दें, पढ़ें फरीदपुर सीट से टिकट के दावेदार डालचंद वाल्मीकि का स्पेशल इंटरव्यू…

विधानसभा के टिकट के लिए समाजवादी पार्टी में अब वाल्मीकि समाज भी आवाज बुलंद करने लगा है. बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट एससी के लिए आरक्षित है. वैसे तो इस सीट से लगभग डेढ़ दर्जन से भी अधिक दावेदार कतार में हैं मगर वाल्मीकि समाज से एकमात्र डालचंद वाल्मीकि ने आवेदन किया है. डालचंद वाल्मीकि किस आधार पर टिकट मांग रहे हैं? अगर पार्टी उन्हें मौका देती है तो वह किन मुद्दों पर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे? डालचंद पिछले करीब 18 वर्षों से सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं. इन 18 वर्षों में उनकी उपलब्धि क्या रही? क्या वह समाजसेवा से भी जुड़े हैं? ऐसे कई बिंदुओं पर पार्षद पति और समाजवादी पार्टी के महानगर सचिव डालचंद वाल्मीकि ने इंडिया टाइम 24 के संपादक नीरज सिसौदिया के साथ खुलकर बात की. पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…
सवाल : आप मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं, पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या रही आपकी?
जवाब : मैं मूल रूप से बरेली का ही रहने वाला हूं और मेरे पिता रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात थे. वर्तमान में मैं सुभाष नगर में रहता हूं. मेरी शुरुआती शिक्षा रेलवे स्कूल से हुई. उसके बाद मैंने बरेली कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस से एमए किया. मेरा छोटा सा एक व्यवसाय है इलेक्ट्रॉनिक्स का. मेरी कोई राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं रही. मैं एक मजदूर का बेटा हूं. मेरे तीन भाई हैं और तीन बहने हैं.
सवाल : आपका राजनीति में कब आना हुआ?
जवाब : लगभग 18 साल पहले समाजवादी पार्टी से मैंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. उस वक्त पूर्व डिप्टी मेयर डा. मोहम्मद खालिद समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष हुआ करते थे. पार्टी में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने मेरी तत्परता को देखते हुए मुझे वार्ड अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी थी और मैं तत्कालीन वार्ड नंबर 2 का अध्यक्ष बन गया. वर्तमान में मेरी पत्नी वार्ड नंबर 4 से पार्षद है और 4 बार मैं महानगर कार्यकारिणी का सचिव रहा. वर्तमान में भी मैं महानगर सचिव के पद पर तैनात हूं. लगभग 10 साल पहले मैं सुभाष नगर से पार्षद का चुनाव लड़ा था. मुझे बहुत अच्छे वोट मिले लेकिन जीत हासिल नहीं कर सका और रामनिवास आर्य चुनाव जीत गए थे. इसके बाद वर्ष 2017 में मैंने अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाया क्योंकि सीट महिला आरक्षित हो गई थी.
सवाल : क्या समाजसेवा से भी आपका कभी जुड़ाव रहा, क्या किसी सामाजिक संगठन से जुड़े हैं आप?
जवाब : मैं वाल्मीकि सभा का अध्यक्ष हूं और वाल्मीकि मजदूर संघ का प्रदेश सचिव भी हूं. साथ ही वाल्मीकि शोभायात्रा प्रबंधन कमेटी का भी अध्यक्ष हूं. सुभाष नगर में वाल्मीकि सभा का अध्यक्ष हूं. समाज सेवा मुझे विरासत में अपने पिता से मिली है. मेरे पिताजी भी समाज सेवा से जुड़े रहे और वाल्मीकि सभा के अध्यक्ष रहे.
सवाल : आप कैंट विधानसभा सीट में राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे. आपकी पत्नी भी इसी विधानसभा सीट के अंतर्गत पड़ने वाले वार्ड से सभासद हैं तो ऐसे में आपने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए फरीदपुर को क्यों चुना?
जवाब : फरीदपुर विधानसभा सीट को मैंने इसलिए चुना क्योंकि सरकार ने आरक्षण की व्यवस्था बना रखी है. प्रदेश की 403 सीटों पर चुनाव होता है जिनमें लगभग 93 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई हैं इसलिए हम अपने लिए आरक्षित सीटों पर ही लड़ना चाहते हैं, दूसरे के हक नहीं मारना चाहते. हम सर्वसमाज की बात करते हैं सिर्फ वाल्मीकि समाज की ही बात नहीं करते.
सवाल : लेकिन प्रत्याशी का अपना भी तो कद मायने रखता है. आप सुभाष नगर में रहते हैं और यहीं से पार्षद भी हैं लेकिन चुनाव लड़ने आप फरीदपुर जा रहे हैं, ऐसे में आपको जनता का वोट कैसे मिलेगा?
जवाब : देखिए यह नगर निगम का चुनाव नहीं है जो मोहल्लों के मुद्दों पर लड़ा जाता है. नगर निगम का चुनाव नाली, सड़कों पर होता है लेकिन विधानसभा और लोकसभा का चुनाव राष्ट्रीय और प्रदेश के मुद्दों पर आधारित होता है. हमारे समाज का 10 से 12 हजार वोट औसतन पूरे मंडल में है. फरीदपुर सीट पर भी लगभग 15 हजार से अधिक वोट है. पूर्व में जो विधायक थे आदरणीय सियाराम सागर साहब वह प्रबल रूप से राजनीति करते थे और नेताजी के बड़े करीबी भी थे. उन्होंने नेताजी के साथ मिलकर समाजवादी पार्टी के लिए बहुत कुछ किया तो उनके रहते किसी को टिकट मांगने का अधिकार भी नहीं था और मांगना भी नहीं चाहिए था.

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सवाल : फरीदपुर सीट से लगभग एक दर्जन से भी ज्यादा दावेदार टिकट मांग रहे हैं तो ऐसे में आप में ऐसा क्या खास है कि टिकट आपको दिया जाए?
जवाब : देखिए, फरीदपुर विधानसभा सीट से जिन्होंने टिकट के लिए दावेदारी की है उनमें 16 लोग जाटव समाज के हैं, तीन धोबी समाज से हैं और मैं अकेला वाल्मीकि समाज से हूं. मैं आपके माध्यम से राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को संदेश देना चाहता हूं कि यदि लगातार चार से पांच बार जाटव समाज को मौका दिया गया, दो बार मौका धोबी समाज को दिया गया लेकिन वाल्मीकि समाज को अभी तक कोई मौका नहीं दिया गया. बरेली ही नहीं पूरे मंडल में वाल्मीकि समाज को मौका कभी नहीं दिया गया. यह प्रतिनिधित्व एक सम्मान होता है समाज के लिए क्योंकि समाज लड़ता है व्यक्ति नहीं लड़ता और इस बार अगर माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी द्वारा वाल्मीकि समाज को सम्मान दे दिया जाए तो मैं समझता हूं मंडल के अंदर एक-एक वाल्मीकि वोट समाजवादी पार्टी को मिल जाएगा. बाकी राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का जो आदेश होगा वह सर्वोपरि होगा.


सवाल : अगर पार्टी आपको मौका देती है तो आप किन मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे? फरीदपुर विधानसभा सीट के विकास का आपका विजन क्या होगा?
जवाब : सड़क, उद्योग धंधे और विकास ही मेरे मुद्दे होंगे. मैं एक मजदूर की औलाद हूं. मैं एसी में पला बढ़ा नहीं हूं और मैंने बहुत ही करीब से गरीबी देखी है. मैं जब बेरोजगारी का आकलन करता हूं तो उन चौराहे पर बैठे हुए मजदूरों से करता हूं जो रोज वहां काम की तलाश में आते हैं और जाने कितनों को बिना काम के ही वापस लौटना पड़ता है. उनमें से कितनों को रोजगार मिलता है तो मेरा आकलन उन लोगों से होता है. मेरा आकलन सरकारी कर्मचारियों से नहीं होता है. मैं जब भी बात करूंगा पढ़े-लिखे युवाओं के विषय में बात करूंगा, रोजी रोजगार की बात करूंगा, शांति व्यवस्था की बात करूंगा, कानून व्यवस्था की बात करूंगा और क्षेत्र के लोगों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहूंगा.

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सवाल : पूरे मंडल में कितने वोट होंगे वाल्मीकि समाज के?
जवाब : अकेले बरेली कैंट विधानसभा सीट में लगभग 35000 आबादी वाल्मीकि समाज की है और मैं सभी संगठनों से जुड़ा हूं. अपने समाज से जुड़ा हुआ हूं. अगर मंडल की बात करें तो औसतन 10-12 हजार वोट हैं हर विधानसभा सीट पर वाल्मीकि समाज के. इसके बावजूद आज तक हमारे समाज के किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया.
सवाल : आप पिछले 18 साल से राजनीति में सक्रिय हैं. इन 18 सालों में आप अपनी उपलब्धि क्या मानते हैं?
जवाब : मैं पार्टी के सभी कार्यक्रमों में शामिल रहता हूं. अभी तक मेरे पास ऐसी कोई पावर नहीं आई जिससे मैं बहुत बड़ा काम करा सकूं लेकिन मेरी पत्नी के पार्षद बनने के बाद मैंने यहां सबसे बड़ी जलभराव की समस्या को खत्म करवाने का काम किया है. उसके लिए नाला निर्माण किया जा रहा है. मैंने सड़कें बनवाईं, काम बहुत करना चाहता था चाहता हूं और चाहता रहूंगा.

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