यूपी

रच दिया इतिहास, नगर निगम के इतिहास में अमर हो गए मेयर उमेश गौतम, जानिये कैसे?

नीरज सिसौदिया, बरेली
‘ये जमाना क्‍या रोकेगा अपनी परवाज को
हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं’
बरेली नगर निगम के महापौर डा. उमेश गौतम पर किसी शायर की ये पंक्तियां एकदम सटीक बैठती हैं। मेयर डा. उमेश गौतम का कार्यकाल वैसे तो कई ऐतिहासिक कार्यों के लिए जाना जाएगा लेकिन नगर निगम की आधुनिक इमारत के शुभारंभ के साथ ही उमेश गौतम का नाम नगर निगम के इतिहास में अमर हो गया। नगर निगम की आधुनिक इमारत का शुभारंभ करके मेयर डा. उमेश गौतम ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और कुछ करने की चाहत हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। यही वजह है कि जो काम पूर्व मेयर डा. आईएस तोमर दस वर्षों में नहीं कर सके उसे डा. उमेश गौतम ने महज चार वर्षों में पूरा कर दिखाया।

बरेली महानगरपालिका को बरेली नगर निगम का दर्जा दिलाने वाले पूर्व मंत्री स्‍व. राम सिंह खन्‍ना के भाई और पूर्व सभासद संतोष खन्‍ना बताते हैं कि बरेली को नगर निगम का दर्जा तो उनके बड़े भाई और कांग्रेस नेता राम सिंह खन्‍ना ने दिलाया था लेकिन नगर निगम की पुरानी इमारत उन्‍होंने नहीं बनवाई थी। वह इमारत उनके मंत्री बनने के दशकों पहले आजादी के आसपास बनी थी। हालांकि, पुरानी इमारत आजादी से पहले बनी थी या बाद में इस संबंध में वह सटीक जानकारी नहीं दे पाते हैं। बस इतना ही कहते हैं कि आजादी के आसपास ही इस भवन का निर्माण हुआ था।

आजादी के सात दशक बीत चुके हैं। इन सात दशकों में देश और दुनिया पूरी तरह बदल गई लेकिन बरेली नगर निगम की इमारत नहीं बदल सकी थी। शुक्रवार को जब मेयर डा. उमेश गौतम लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से बनी नगर निगम की नई इमारत का शुभारंभ कर रहे थे तो कुछ विरोधी दलों के नेता यह कहते नजर आए कि इस इमारत का प्रस्‍ताव तो पूर्व मेयर डा. आईएस तोमर के समय में पास हुआ था। यहां पर उल्‍लेखनीय है कि डा. आईएस तोमर दो बार मेयर बने लेकिन नगर निगम की नई इमारत बनाने के लिए उनका दस साल का कार्यकाल भी कम पड़ गया। इससे भी ज्‍यादा हैरानी की बात यह है कि डा. आईएस तोमर से पहले जितने भी मेयर हुए उन्‍होंने इस इमारत के आधुनिकीकरण का प्रस्‍ताव तक लाना जरूरी नहीं समझा।


वक्‍त बदला और सत्‍ता भी बदली। कुछ समय पहले तक मेयर की कुर्सी पर काबिज डा. आईएस तोमर की जगह डा. उमेश गौतम ने ली। उमेश गौतम को आईएस तोमर से नगर निगम की विरासत के रूप में बदहाल शहर, पुरानी इमारत और चरमराई हुई व्‍यवस्‍था के अलावा कुछ नहीं मिला था लेकिन उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी और अपनी सूझबूझ से पहले निगम की आमदनी में इजाफा किया और फिर विकास कार्यों की शुरुआत की। चार साल के कार्यकाल में लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये से भी अधिक के विकास कार्य करवाकर उमेश गौतम ने यह साबित कर दिया कि काम पहले भी हो सकते थे लेकिन ईमानदार सोच न होने की वजह से नहीं हो सके।

डा. आईएस तोमर के सिपहसालारों ने अपना तो खूब विकास किया मगर पुराना शहर और सुभाष नगर की पुलिया जैसे बदहाल इलाकों में जलभराव जैसी समस्‍या के स्‍थाई समाधान के लिए कुछ नहीं किया। उन्‍होंने नगर निगम की नई इमारत बनाने का सपना तो दिखाया मगर वह भी कागजों में ही सिमटकर रह गया। उमेश गौतम ने विकास को प्राथमिकता दी और नये नजरिये से विकास की नई इबारत लिखी। भाजपा का वनवास तोड़कर मेयर की कुर्सी पर काबिज होने वाले उमेश गौतम ने आज आजादी के दौर की उस इमारत की जगह बरेली नगर निगम को एक आधुनिक इमारत की सौगात दी है। किसी कॉर्पोरेट ऑफिस की तर्ज पर डिजाइन की गई इस इमारत के निर्माण के बाद यहां आने वाली जनता को भीषण गर्मी में भी परेशान नहीं होना पड़ेगा। कड़ाके की ठंड में भी यह इमारत उनकी मुश्किलें कम करती नजर आएगी। यहां बनने वाला इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर पूरे शहर पर नजर रखेगा और यह सब संभव हो पाया है तो सिर्फ आधुनिक सोच की वजह से।


यह उमेश गौतम की आधुनिक सोच का ही नतीजा है कि शुक्रवार को जब मेयर इस ऐतिहासिक कार्य का शुभारंभ कर रहे थे तो समाजवादी पार्टी के पार्षदों में मेयर के साथ फोटो खिंचवाने की होड़ लग गई। हर कोई इस ऐतिहासिक पल को हमेशा के लिए यादगार बनाना चाहता था।

शुभारंभ समारोह में ये रहे मौजूद
नगर आयुक्‍त अभिषेक आनंद, पूर्व उपसभापति छंगामल मौर्य, पूर्व उपसभापति अतुल कपूर, पार्षद अजय चौहान, विनोद सैनी, शमीम अहमद, दीपक सक्‍सेना, राजकुमार, रेहान खान, नौशाद, संजय राय, सुभाष पांडेय, विनोद जोशी, आरिफ कुरैशी, अकील गुड्डू, मुनेंद्र यादव, लेखराज मोटवानी, मुशर्रफ अंसारी, संजय गुप्‍ता आदि।

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