झारखण्ड

बेबसी : जंगल में हुआ प्रसव, नवजात बच्ची को पालने में असमर्थ मां जिंदगी भर के लिए अलग करने को तैयार

रामचंद्र कुमार अंजाना, बोकारो थर्मल

पेट की आग बुझाने की मजबूरी ने कोयलांचल की बेटियों को इतना बेबस कर दिया है कि गर्भावस्था में भी वे जंगलों की खाक छानने को मजबूर हैं। सरकारी योजनाओं को ठेंगा दिखाती हुई दो घटनाएं आज बेरमो कोयलांचल में देखने को मिलीं। शुक्र है कि गरीबों की इस बेबसी ने किसी की जान नहीं ली लेकिन ये लापरवाही जानलेवा भी हो सकती थी। बुधवार को बेरमो में दो अलग – अलग जगहों पर जिस तरह से दो महिलाओं ने दो बच्चों को जन्म दिया वह सरकारी दावों की हकीकत के साथ ही गरीबों की बेबसी की दास्तान भी बयां कर रही है। एक महिला ने जंगल में तो दूसरी महिला ने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। बेबसी का आलम यह है कि एक मां अपनी नवजात बच्ची का पालन पोषण करने में असमर्थ है इसलिये उसे दूसरे को गोद देने के लिए भी तैयार है। पहली घटना कंजकिरो स्थित आरजे पेट्रोल पंप के हुई।

टेम्पों में ऊपरघाट के गोनियांटो निवासी गणेश महतो व उसकी गर्भवती पत्नी अंजू देवी को लेकर बोकारो थर्मल अस्पताल जा रहे थे। इसी दौरान टेम्पो ड्राइवर पंप में तेल भराने के लिए रूका, इसी पंप परिसर में महिला पानी पीने गयी और पानी पीने के पश्चात प्रसव पीड़ा शुरू हो गयी। प्रसव पीड़ा शुरू होन के पश्चात महिला पंप की चहारदिवारी के समीप लेट गयी और एक मासूम बच्ची को जन्म दिया। बाद में पंप के मालिक गोविंदपुर निवासी जानकी महतो ने चिकित्सा सुविधा मुहैया करायी। घंटों बाद उसे डॉक्टरों ने जांचोपरांत घर भेज दिया। दूसरी घटना बोकारो थर्मल के घनघोर फेस दो जंगल में हुई। यहां पेटवार के ओरदाना निवासी गुड़िया देवी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। जंगल गए पिलपिलो गांव के ग्रामीणों जब देखा, तो हैरान रह गए। महिला ने बच्चे को जन्म देने के बाद सुरक्षित तरीके से नल काटी। जंगल में बच्ची की जन्म की सूचना मिलने के बाद गांव के दर्जनों ग्रामीण जंगल पहुंचे और महिला से बात कर रोहित महतो ने बाइक में बैठाकर उसके घर (मायके) पहुंचाया। बिडंबना देखिए, महिला गुडिया देवी के पति की लगभग छह माह पहले ही मौत हो चुकी है। मायके में उसके पिता भी थे लेकिन वह भी सालभर पहले चल बसे हैं। इससे पहले से भी महिला के तीन बच्ची हैं। जंगल में जब संवाददाता ने महिला से पूछा तो उसने बताया कि कोई अगर यह बच्ची का लालन पोषण करने की जिम्मेवारी लेगा तो वह बच्ची देने को तैयार है। पहले से भी तीन बच्ची हैं। इस दुनिया में एक बूढ़ी मां के अलावा सिर्फ भगवान का दिया हुआ दर्द है। पहले बाप का साया उठ गया, फिर पति चल बसा। ससुराल वाले दूसरा ठोर ठिकाना तलाशने की बात कहकर दुत्कारते है। संयोग कहिए कि इस घनघोर जंगल में किसी जंगली जानवर की नजर नहीं पड़ी। पेट्रोल पंप की  घटना लगभग 11 बजे की है और दूसरी जंगल वाली लगभग शाम चार बजे की है।

प्रसव के बाद महिला बच्ची को लेकर जंगल के पगडंडी में एक किमी चली 

महिला बच्ची को जन्म देने के बाद उसे लेकर जंगल की पगडंडी पर लगभग एक किमी दूर चली, चूंकि वहां बाइक भी चलने लाइक जगह नहीं था, जहां पर वह बच्ची को जन्म दी थी। इसके बाद उसे बाइक पर बैठाकर घर पहुंचाया गया।

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