नीरज सिसौदिया, बरेली
न्यू मॉडल कॉलोनी के सैकड़ों छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए उस समय चिंता बढ़ गई जब उनके ऊपर दुकान तोड़ने का फरमान आने की खबर आई। व्यापारी घबराकर अपने प्रतिनिधियों के साथ पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ “मम्मा” के पास पहुंचे और उनसे समस्या का तुरंत समाधान कराने की गुहार लगाई। पार्षद मम्मा ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और तुरंत सक्रिय होकर व्यापारियों की आवाज़ को झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और यूपी सरकार के वन राज्य मंत्री डॉ. अरुण कुमार तक पहुंचाया।
न्यू मॉडल कॉलोनी में कई दुकानें दशकों से चल रही हैं जिनमें कपड़े की दुकानें, किराना, सब्जी और छोटे इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी शामिल हैं। यहां के कई परिवारों की रोज़ी-रोटी इन्हीं दुकानों से चलती है। व्यापारियों ने बताया कि अचानक दुकानों को हटाने या तोड़ने के आदेश आने से वे बेहद चिंतित हैं। उनका कहना था कि यदि दुकानें टूट गईं तो परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और कई जरूरी काम प्रभावित होंगे। कुछ व्यापारियों ने पार्षद मम्मा से याचना की कि उनकी दुकानों को वैसे ही रहने दिया जाए या कोई वैकल्पिक व्यवस्था बताई जाए।
व्यापारियों की पीड़ा सुनकर पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना “मम्मा” ने तुरंत ही मामला उच्च स्तर पर उठाने का निर्णय लिया। वे व्यापारियों के प्रतिनिधि दल को लेकर तत्काल बरेली के पूर्व सांसद और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से मिले, जहां व्यापारियों ने अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। राज्यपाल ने गंभीरता से सुनने के बाद समस्या के समाधान के लिए रेलवे विभाग की डीआरएम बीना सिन्हा से फोन पर बात की और मामला त्वरित ध्यान में लाने का आश्वासन दिया। इस संपर्क से व्यापारियों को पहला सांत्वना भरा अहसास हुआ कि उनकी बात सुनी जा रही है और प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्यपाल द्वारा स्थिति से अवगत कराने के बाद मामला शहर विधायक व वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना के पास भी पहुंचा। पार्षद मम्मा और व्यापारी प्रतिनिधि मंत्री के कार्यालय गए और सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक वहां अपनी समस्या रखकर बैठे रहे। इस दौरान मंत्री ने डीआरएम बीना सिन्हा से तीन बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, पर उस समय उनसे बात नहीं हो पाई।
शाम को पार्षद मम्मा फिर मंत्री अरुण कुमार सक्सेना के पास पहुंचे। मंत्री ने बताया कि राज्यपाल और डीआरएम के बीच बातचीत हुई है और डीआरएम ने सोमवार सुबह 11 बजे एक बैठक करने का आश्वासन दिया है। इस बैठक में मंत्री, डीआरएम, वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार, पार्षद मम्मा और कुछ व्यापारी प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।
व्यापारियों की मांगें स्पष्ट हैं कि या तो दुकानों को नुकसान से बचाया जाए या फिर उन्हें हटाने के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था, मुआवजा या फिर नए ठिकाने पर शिफ्ट करने का सुव्यवस्थित प्रस्ताव पेश किया जाए। कई दुकानदारों ने बताया कि वे वर्षों से उसी जगह पर व्यापार कर रहे हैं और उनके पास दुकान हटाने के कारण संक्रमणकालीन अवधि में जीविका बनाए रखने का कोई विकल्प नहीं होगा। कुछ ने यह भी कहा कि प्रशासन को पहले उनसे चर्चा करनी चाहिए थी, न कि अचानक तोड़फोड़ के आदेश जारी किए जाने चाहिए थे।
न्यू मॉडल कॉलोनी के छोटे कारोबारियों की हालत आम तौर पर कमजोर वर्गों से जुड़ी होती है। इन दुकानों पर काम करने वाले लोग हर रोज कमाते हैं और बचत कम होती है। इसलिए दुकान टूटने का मतलब केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संकट भी है। महिलाओं के रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और परिवार के अन्य खर्चे सीधे प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि व्यापारी जन-समूह ने पार्षद मम्मा से मदद की अपील की और उन्होंने भी इसे प्राथमिकता दी।
इस पूरे घटनाक्रम में पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना “मम्मा” की सक्रियता सबसे प्रमुख रही। व्यापारी कहते हैं कि मम्मा ने तत्काल उनसे मुलाकात कर उनका दुख सुना और बार-बार विभागीय अधिकारियों तथा उच्चाधिकारियों से संपर्क कर मामले को आगे बढ़ाया। स्थानीय लोगों ने भी मम्मा की प्रशंसा की कि वे समय पर मुद्दे को उठाते हैं और जनता की आवाज़ को दबने नहीं देते। इस पहल के कारण व्यापारियों में संकट के बीच कम-से-कम उम्मीद की किरण दिखाई दी।
मिली जानकारी के अनुसार, डीआरएम बीना सिन्हा ने सोमवार सुबह 11 बजे बैठक के लिए सहमति व्यक्त की है। बैठक में उपरोक्त अधिकारियों और व्यापारी प्रतिनिधियों के साथ बैठकर इस मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने की बात तय हुई है। बैठक में यह तय हो सकता है कि तोड़फोड़ के आदेश पर रोक लगाई जाए, या दुकान-मालिकों को वैकल्पिक व्यवस्था की रूपरेखा और समयसीमा दी जाए। व्यापारी इस बैठक से सकारात्मक नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं।
व्यापारियों ने राज्यपाल और मंत्री एवं पार्षद मम्मा का आभार व्यक्त किया है कि उन्होंने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया और उच्चाधिकारियों के साथ बातचीत कर समाधान की दिशा में कदम उठाया। कई व्यापारियों ने कहा कि मम्मा की वजह से ही उनकी आवाज़ इतनी ऊंचाई तक पहुंची और अब वे सोमवार की बैठक से उम्मीद लगाए हुए है।

वर्तमान में न्यू मॉडल कॉलोनी के व्यापारी सोमवार की निर्धारित बैठक पर अपनी निगाहें टिका रहे हैं। बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दुकान तोड़ने के आदेश पर क्या कार्रवाई होगी और व्यापारी किस प्रकार से सुरक्षा या वैकल्पिक व्यवस्था पा सकेंगे। व्यापारी तथा स्थानीय लोग आशान्वित हैं कि बैठक में उनकी समस्या का ध्यानपूर्वक समाधान निकाला जाएगा।





