नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और बरेली कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार इंजीनियर अनीस अहमद खां 14 अप्रैल को संविधान निर्माता भीमराव अंबेढकर की जयंती सेवा, समर्पण और सम्मान के भाव के साथ मनाने जा रहे हैं। बता दें कि हर साल की तरह इस बार भी शहर में बाबा साहेब को समर्पित एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में उनके अनुयायी शामिल होंगे।
इंजीनियर अनीस अहमद खां की ओर से इस शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया जाएगा। इसके लिए शहर के प्रमुख स्थल पटेल चौराहे पर एक विशेष कैंप लगाया जा रहा है, जहां से शोभायात्रा में शामिल लोगों का स्वागत और सत्कार किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। पटेल चौराहे पर लगाए जा रहे कैंप में शोभायात्रा में शामिल बाबा साहेब के अनुयायियों के लिए जलपान की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा भी की जाएगी, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय और श्रद्धामय बना रहेगा।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिर्फ जयंती मनाना नहीं, बल्कि समाज में एकजुटता और सम्मान का संदेश देना है। आयोजन के दौरान शोभायात्रा में शामिल दलित समाज के लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा। इंजीनियर अनीस अहमद खां का मानना है कि बाबा साहेब के विचार आज भी समाज को दिशा देने वाले हैं और उनके आदर्शों को अपनाकर ही एक समतामूलक समाज का निर्माण किया जा सकता है।
बरेली कैंट सीट पर इंजीनियर अनीस अहमद की मजबूत दावेदारी के बीच यह आयोजन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि अनीस अहमद खां इसे पूरी तरह सामाजिक कार्यक्रम बताते हैं, लेकिन इससे उनके जनसंपर्क और सामाजिक आधार को मजबूती मिलने की भी संभावना है।
इंजीनियर अनीस अहमद खां ने कहा कि यह आयोजन सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जिस समाज की कल्पना की थी, वह तभी साकार हो सकता है जब सभी वर्गों को समान अधिकार और सम्मान मिले। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बराबरी और न्याय सुनिश्चित करना ही बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न सिर्फ श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक होगा, बल्कि समाज में एकता और समानता का संदेश भी देगा। बरेली में यह आयोजन सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां एक तरफ बाबा साहेब के विचारों को याद किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक समरसता को मजबूत करने की कोशिश भी नजर आएगी।




