नीरज सिसौदिया, बरेली
एक तरफ पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल का गुस्सा अपनी ही सरकार के खिलाफ फूट पड़ा है. बरेली कैंट विधानसभा सीट से विधायक राजेश अग्रवाल ने एक ट्वीट कर सरकार के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करते हुए बरेली जिले के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है.
दरअसल, बरेली में पिछले कई दिनों से कोरोना मरीजों के उपचार को लेकर अव्यवस्थाएं चरम पर थीं. कहीं इंजेक्शन नहीं मिल रहा है तो कहीं ऑक्सीजन नहीं मिल रही है तो कहीं बेड ही नहीं उपलब्ध हैं. आज तो तीन सौ बेड कोविड अस्पताल में भी ऑक्सीजन का संकट गहरा गया. योगी सरकार बरेली के लिए ऑक्सीजन भेजने की बात तो कहती रहती है लेकिन बरेली पहुंचने से पहले ही ऑक्सीजन दूसरे जिलों को दे दी जाती है. इसका खामियाजा बरेली वासियों को भुगतना पड़ रहा है. ऐसे में जनता का गुस्सा स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर फूट रहा है. विधायकों के पास लोग मदद मांगने आ रहे हैं लेकिन विधायक उनकी मदद नहीं करवा पा रहे हैं. इतना ही नहीं ऑक्सीजन की कालाबाजारी की खबरें जरूर आम हो रही हैं. रविवार को बरेली में ऑक्सीजन ही खत्म हो गई तो कैंट विधायक राजेश अग्रवाल का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को ट्वीट करते हुए लिखा, ‘बरेली में ऑक्सीजन समाप्त, व्यवस्था भंग? बार-बार बरेली आ रही ऑक्सीजन को अन्य जनपदों में भेज देते हैं? लोगों की सांसें संकट में?व्यवस्था हेतु निर्देशित करें.’ राजेश अग्रवाल ने अपने ट्वीट में मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी, एसपी गोयल और बरेली जिलाधिकारी को टैग किया है.
भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष द्वारा व्यवस्था भंग होने की बात कहना निश्चित तौर पर योगी सरकार की बहुत बड़ी नाकामी है. पूर्व वित्त मंत्री की यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के दावों की हकीकत बयां कर रही है. राजेश अग्रवाल के ट्वीट के बाद यह साबित हो गया है कि कोरोना से जंग में यूपी सरकार पूरी तरह से नाकाम हो चुकी है. राजेश अग्रवाल ने तो यह महसूस कर लिया है कि भाजपा के राज में लोगों की सांसें संकट में हैं पर सरकार इस सच का सामना कब करेगी? राजेश अग्रवाल का ट्वीट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन दावों को भी खोखला साबित कर रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में कहीं भी ऑक्सीजन का कोई संकट नहीं है. यही बात एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में भी कही थी.
राजेश अग्रवाल का दर्द निश्चित तौर पर उस वक्त छलका है जब पानी सिर से ऊपर निकल चुका है. राजेश अग्रवाल का यह कदम निश्चित तौर पर सराहनीय है. सराहनीय इसलिए कि खोखले सरकारी दावों का ढिंढोरा पीटने की जगह वह जनता की आवाज बने और अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री को आईना दिखाने की हिम्मत जुटा सके. अगर राजेश अग्रवाल जैसी हिम्मत अन्य जनप्रतिनिधि और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार भी दिखा पाते तो शायद बरेली इतने बुरे दौर से नहीं गुजर रहा होता. मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ अगर अब भी नहीं जागे तो बरेली में लाशों के ढेर लगने से कोई नहीं रोक पाएगा और आगामी विधानसभा चुनावों में यूपी में भी भाजपा का वही हाल होगा जो आज पश्चिम बंगाल में हुआ है.




