एक अप्रैल से 30 जून के बीच किया गया सर्वे, 5000 हिंदू और 5000 मुस्लिम मतदाताओं को किया गया शामिल; सिख, जैन, ईसाई और अन्य समुदायों के मतदाता सर्वे से बाहर
पुराना शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों से लेकर सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, शांति विहार और रामपुर बाग जैसे हिंदू बहुल क्षेत्रों के लोगों की भी ली गई राय
नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है। पार्टी के टिकट के लिए कई नाम चर्चा में हैं और इनमें राजेश अग्रवाल, डॉक्टर अनीस बेग, संजीव सक्सेना, इंजीनियर अनीस अहमद खां और समर्थ मिश्रा प्रमुख दावेदारों के रूप में सामने आ रहे हैं। इसी बीच indiatime24.com की ओर से कराया गया एक सर्वे इन दावेदारों की लोकप्रियता और संभावित स्वीकार्यता को लेकर महत्वपूर्ण तस्वीर सामने रखता है।
दरअसल, indiatime24.com ( इंडिया टाइम 24) की ओर से बरेली जिले की छह विधानसभा सीटों बरेली कैंट, बरेली शहर, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर, बहेड़ी और भोजीपुरा पर समाजवादी पार्टी के संभावित टिकट दावेदारों को लेकर सर्वे किया गया है। इस सर्वे सीरीज में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से बातचीत कर संभावित उम्मीदवारों की लोकप्रियता, उनकी छवि और चुनावी स्वीकार्यता को समझने का प्रयास किया गया है। इस सीरीज के तहत आज बरेली कैंट विधानसभा सीट की सर्वे रिपोर्ट प्रकाशित की जा रही है। आने वाले दिनों में जिले की अन्य विधानसभा सीटों से जुड़े सर्वे के निष्कर्ष भी सामने रखे जाएंगे।
इंडिया टाइम 24 के इस सर्वे में कुल 10 हजार लोगों से बातचीत की गई। सर्वे एक अप्रैल से 30 जून के बीच कराया गया। इसमें 20 से 70 वर्ष तक की आयु के लोगों को शामिल किया गया। सर्वे की सैंपल संरचना के मुताबिक, कुल 10 हजार प्रतिभागियों में 5000 हिंदू और 5000 मुस्लिम मतदाता शामिल थे। सर्वे में सिख, जैन, ईसाई और अन्य समुदायों के मतदाताओं को शामिल नहीं किया गया**। इसलिए सर्वे के आंकड़े मुख्य रूप से हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के बीच सामने आए रुझानों को दर्शाते हैं और इन्हें कैंट विधानसभा क्षेत्र के सभी समुदायों के मतदाताओं की समग्र राय नहीं माना जा सकता।
सर्वे में कैंट विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक क्षेत्रों को शामिल करने का प्रयास किया गया। इसके तहत मुस्लिम बहुल पुराने शहर के विभिन्न इलाकों के साथ-साथ हिंदू बहुल क्षेत्रों में आने वाले सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, शांति विहार, रामपुर बाग समेत विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के लोगों से बातचीत की गई। इस तरह सर्वे में विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों की राय लेने का दावा किया गया।
इंडिया टाइम 24 के सर्वे में लोगों से बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों में उनकी पसंद को लेकर राय जानी गई। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, राजेश अग्रवाल इस सर्वे में सबसे आगे रहे। कुल 33 प्रतिशत लोगों ने उन्हें अपनी पहली पसंद बताया। इन लोगों ने राजेश अग्रवाल को गंभीर, सक्रिय और जन आंदोलनों से जुड़े जमीनी नेता के तौर पर पसंद किया।

सर्वे के नतीजों में दूसरे स्थान पर डॉक्टर अनीस बेग रहे। उन्हें 20 प्रतिशत लोगों ने अपना पसंदीदा उम्मीदवार बताया। सर्वे में अनीस बेग को पसंद करने वाले लोगों ने उनकी आर्थिक रूप से मददगार और जरूरतमंदों की सहायता करने वाले नेता की छवि को उनकी प्रमुख खूबियों में गिना। लोगों के मुताबिक, जरूरत के समय व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक मदद करना और कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े रहना उनकी लोकप्रियता की एक बड़ी वजह है।

इसके बाद इंजीनियर अनीस अहमद खां को 17 प्रतिशत, संजीव सक्सेना को 15 प्रतिशत और समर्थ मिश्रा को 8 प्रतिशत लोगों ने पसंदीदा उम्मीदवार बताया। वहीं बाकी 7 प्रतिशत लोगों ने सुप्रिया ऐरन समेत अन्य अलग-अलग नेताओं के नामों को अपनी पसंद बताया।

सर्वे में किसे कितना समर्थन
| दावेदार | पसंद करने वाले लोग |
| ———————- | —————–: |
| राजेश अग्रवाल | 33 प्रतिशत |
| डॉक्टर अनीस बेग | 20 प्रतिशत |
| इंजीनियर अनीस अहमद खां | 17 प्रतिशत |
| संजीव सक्सेना | 15 प्रतिशत |
| समर्थ मिश्रा | 8 प्रतिशत |
| सुप्रिया ऐरन व अन्य | 7 प्रतिशत |
80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने मुस्लिम उम्मीदवार को लेकर जताई असहमति
इंडिया टाइम 24 के सर्वे का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के संभावित मुस्लिम उम्मीदवार को लेकर सामने आया। सर्वे में शामिल 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने यह राय जाहिर की कि कैंट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी का मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सकता। वहीं करीब 20 प्रतिशत लोगों ने इस राय से अलग मत व्यक्त किया या माना कि मुस्लिम उम्मीदवार भी चुनाव जीत सकता है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह निष्कर्ष इंडिया टाइम 24 के सर्वे में शामिल 10 हजार प्रतिभागियों की राय** पर आधारित है। चूंकि सर्वे में 5000 हिंदू और 5000 मुस्लिम मतदाताओं को शामिल किया गया और सिख, जैन, ईसाई तथा अन्य समुदायों को इसमें शामिल नहीं किया गया, इसलिए इस आंकड़े को बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदाताओं की राय नहीं माना जा सकता। यह सर्वे के निर्धारित सैंपल में सामने आया एक रुझान है।
सर्वे में यह सवाल ऐसे समय में सामने आया है, जब कैंट विधानसभा सीट पर सपा के टिकट के लिए कई नाम चर्चा में हैं और इनमें डॉक्टर अनीस बेग तथा इंजीनियर अनीस अहमद खां जैसे मुस्लिम दावेदार भी शामिल हैं। हालांकि यह आंकड़ा किसी उम्मीदवार की व्यक्तिगत लोकप्रियता का सीधा पैमाना नहीं है, बल्कि सर्वे में शामिल लोगों की चुनावी धारणा को दर्शाता है।
इस निष्कर्ष को सपा के टिकट के दावेदारों के आंकड़ों के साथ जोड़कर देखें तो सर्वे में सबसे आगे रहने वाले राजेश अग्रवाल की दावेदारी मजबूत नजर आती है। उन्हें 33 प्रतिशत लोगों ने पसंदीदा उम्मीदवार बताया है। उनके पक्ष में राय देने वाले लोगों ने उनकी गंभीर छवि, जन आंदोलनों से जुड़ाव और जमीनी सक्रियता को प्रमुख वजह बताया है।
दूसरी ओर, डॉक्टर अनीस बेग को 20 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला है। उन्हें पसंद करने वाले लोगों के बीच उनकी आर्थिक रूप से मददगार नेता की छवि भी एक प्रमुख कारण के तौर पर सामने आई है। जरूरतमंदों की आर्थिक मदद और सामाजिक स्तर पर लोगों के साथ खड़े रहने को उनके समर्थक उनकी राजनीतिक ताकत मानते हैं।
सर्वे की खास बात यह बताई गई है कि इसमें कैंट विधानसभा क्षेत्र के केवल एक वर्ग या एक इलाके के लोगों को शामिल नहीं किया गया, बल्कि विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों से राय लेने का प्रयास किया गया। पुराने शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों से लेकर सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, शांति विहार और रामपुर बाग जैसे हिंदू बहुल क्षेत्रों तक लोगों से बातचीत की गई।
इंडिया टाइम 24 के सर्वे के मुताबिक, इसका उद्देश्य कैंट विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संभावित उम्मीदवारों की स्वीकार्यता को समझना था। इसी वजह से 20 से 70 वर्ष तक के अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को भी सर्वे में शामिल किया गया। हालांकि सर्वे में प्रत्येक इलाके से कितने लोगों की राय ली गई, नमूना चयन का तरीका क्या रहा और प्रतिभागियों का चयन किस अनुपात में किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इसके आंकड़ों को एक स्थानीय सर्वे के निष्कर्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सर्वे में राजेश अग्रवाल का 33 प्रतिशत समर्थन हासिल करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके बाद दूसरे स्थान पर रहे डॉक्टर अनीस बेग को 20 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। दोनों के बीच 13 प्रतिशत अंकों का अंतर है। वहीं इंजीनियर अनीस अहमद खां को 17 प्रतिशत और संजीव सक्सेना को 15 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है।

राजेश अग्रवाल की बढ़त को उनके समर्थक उनकी जमीनी राजनीति और जन आंदोलनों से जोड़कर देख रहे हैं। सर्वे में शामिल लोगों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में सामने आई, जो स्थानीय समस्याओं को लेकर लगातार सक्रिय रहते हैं और जनता के मुद्दों को उठाने में आगे रहते हैं। गंभीर छवि और जन आंदोलन से जुड़े होने को उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के तौर पर बताया गया।
वहीं, डॉक्टर अनीस बेग का 20 प्रतिशत समर्थन यह भी दर्शाता है कि उनके पक्ष में एक महत्वपूर्ण वर्ग मौजूद है। उन्हें पसंद करने वाले लोगों के बीच उनकी आर्थिक रूप से मददगार नेता की छवि चर्चा में रही। जरूरतमंदों की आर्थिक मदद और सामाजिक जुड़ाव को उनकी लोकप्रियता की प्रमुख वजह बताया गया है।
इंजीनियर अनीस अहमद खां को 17 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला है। वह तीसरे स्थान पर हैं और उनका आंकड़ा भी यह बताता है कि कैंट सीट पर उनके पक्ष में एक महत्वपूर्ण समर्थक वर्ग मौजूद है। संजीव सक्सेना को 15 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है और वह चौथे स्थान पर हैं। वहीं समर्थ मिश्रा को 8 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। 7 प्रतिशत लोगों ने सुप्रिया ऐरन और अन्य नेताओं के नामों को अपनी पसंद बताया।

टिकट चयन में सामाजिक समीकरण बनाम लोकप्रियता की परीक्षा
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के लिए टिकट का फैसला कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकता है। एक तरफ पार्टी के सामने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ ऐसा उम्मीदवार उतारने का सवाल है जिसकी क्षेत्र में व्यापक स्वीकार्यता हो और जो विभिन्न वर्गों के मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद कर सके।
सर्वे के आंकड़ों में एक ओर जहां राजेश अग्रवाल को सबसे अधिक 33 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला है, वहीं दूसरी ओर 80 प्रतिशत प्रतिभागियों की राय है कि सपा का मुस्लिम उम्मीदवार कैंट सीट से चुनाव नहीं जीत सकता। इन दोनों आंकड़ों को एक साथ देखने पर यह संकेत मिलता है कि सर्वे में शामिल लोगों का एक बड़ा वर्ग टिकट के लिए ऐसे उम्मीदवार को प्राथमिकता दे रहा है, जिसकी स्वीकार्यता व्यापक हो और जो चुनावी मुकाबले में जीत की स्थिति बना सके।
दूसरी ओर, डॉक्टर अनीस बेग की 20 प्रतिशत लोकप्रियता यह संकेत देती है कि व्यक्तिगत मदद और सामाजिक जुड़ाव की उनकी छवि के कारण उनके पक्ष में भी एक महत्वपूर्ण समर्थन मौजूद है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि संभावित जीत, सामाजिक समीकरण और विभिन्न वर्गों के बीच स्वीकार्यता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
फिर भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि बरेली कैंट का चुनावी समीकरण केवल इस सर्वे के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। कैंट सीट में अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक संरचना, मतदाताओं की प्राथमिकताएं और स्थानीय मुद्दे चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी तरह उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और पार्टी संगठन की सक्रियता भी चुनावी नतीजे को प्रभावित कर सकती है।

किसी भी सर्वे के आंकड़ों को अंतिम राजनीतिक परिणाम का संकेत नहीं माना जा सकता। चुनावी राजनीति में उम्मीदवार चयन, पार्टी संगठन की स्थिति, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे, जातीय समीकरण और मतदान के समय मतदाताओं का रुझान जैसे कई कारक अंतिम परिणाम को प्रभावित करते हैं। टिकट मिलने के बाद उम्मीदवार की स्थिति में भी बदलाव संभव है।
फिलहाल indiatime24.com (इंडिया टाइम 24 डॉट कॉम) के बरेली जिले की छह विधानसभा सीटों पर किए जा रहे सर्वे की श्रृंखला में कैंट विधानसभा सीट की रिपोर्ट ने समाजवादी पार्टी के टिकट की दौड़ में शामिल दावेदारों की लोकप्रियता को लेकर एक तस्वीर जरूर सामने रखी है। सर्वे में राजेश अग्रवाल सबसे आगे हैं, जबकि डॉक्टर अनीस बेग दूसरे और इंजीनियर अनीस अहमद खां तीसरे स्थान पर हैं। संजीव सक्सेना और समर्थ मिश्रा भी इस दौड़ में अपनी जगह बनाए हुए हैं।
अब नजर इस बात पर होगी कि समाजवादी पार्टी का नेतृत्व टिकट चयन के दौरान किस फार्मूले को प्राथमिकता देता है—व्यक्तिगत लोकप्रियता, जमीनी सक्रियता, सामाजिक समीकरण या चुनाव जीतने की क्षमता। इस सर्वे सीरीज के तहत बरेली शहर, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर, बहेड़ी और भोजीपुरा विधानसभा सीटों के नतीजे सामने आने के बाद जिले में सपा के संभावित टिकट दावेदारों की लोकप्रियता और स्वीकार्यता को लेकर तस्वीर और व्यापक हो सकती है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है और चुनावी मैदान में वास्तविक तस्वीर मतदान के बाद ही सामने आएगी।



