विचार

प्रज्ञा यादव की कविताएं : ‘ट्विंकल की आखिरी आवाज’

माँ बहुत दर्द सह कर बहुत दर्द देकर
तुझसे कुछ कह कर मैं जा रही हूँ
आज मेरी विदाई पर जब सहेलिया मिलने आयेगी
सफ़ेद जोड़े में लिपटी देख सिसक सिसक कर मर जायेगी
लड़की होने का खुद पर वो अफ़सोस जताएगी
माँ तू उन्हें इतना कह देना
दरिंदो की दुनिया में संभल कर रहना
माँ राखी पर जब भैया की कलाई सूनी रह जायेगी ,
याद मुझे कर कर जब आँखे उनकी भर जायेगी
तिलक माथे पर करने को माँ रूह मेरी भी मचल जायेगी
माँ, तू भैया को रोने न देना
मैं साथ हूँ उनके हमेशा , इतना कह देना
माँ , पापा भी चुप चुप कर बहुत रोयेंगे ,
मैं कुछ न कर पाया , ये कह कर खुद को कोसेंगे
माँ दर्द उन्हें ये होने न देना
इल्जाम कोई लेने न देना
वो अभिमान है मेरा, सम्मान है मेरा
उनसे बस इतना कह देना ,,
माँ तेरे लिए अब क्या कहूँ
दर्द को तेरे शब्दो में कैसे बयाँ करू
फिर से जीने का मौका कैसे माँगू
माँ लोग तुझे सतायेंगे , तुझपे इलज़ाम बहुत लगाएंगे
माँ सब सह लेना , पर ये कभी न कहना … कि
अगले जनम मोहे बिटिया न देना
प्रज्ञा यादव

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