इंटरव्यू

सेहत की बात : टॉन्सिल्स (तुण्डिकेरी शोथ) क्या है, कारण, लक्षण और निवारण बता रहे हैं डा. रंजन विशद

स्थूलस्तोददाहप्रापकी प्रागुक्ताभ्यां तुण्डिकेरी मता तु ! अर्थात कफ और रक्त से उत्पन्न होने वाले मोटे, जलन और पाकयुक्त शोथ को तुण्डिकेरी कहते हैं. गाल और तालुसंधि तथा हनुसन्धि के समीप दोनों पार्श्वों में एक-एक ग्रंथि होती हैं उन्हें टॉन्सिल कहते हैं. यह रोग अधिकांशतया हेमंत और वसंत ऋतु में होता हैं.
टॉन्सिलाइटिस या टॉन्सिल गले से जुड़ी बीमारी है जिसमें गले के दोनों ओर सूजन आ जाती है. शुरुआत में मुंह के अंदर गले के दोनों ओर दर्द महसूस होता है और बार-बार बुखार भी आता है. टॉन्सिल के कारण कई अन्य तरह परेशानियां भी आ घेरती हैं। यह हमारे शरीर की लसीका प्रणाली (Lymphatic System) का हिस्सा हैं जो बाहरी संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।
टॉन्सिल्स आकार में 2.5 से.मी. लम्बे, 2 से.मी. चौड़े और 1.2 से.मी. मोटे होते हैं। वैसे तो टॉन्सिलाइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन यह अधिकतर बचपन में होता है। यह बच्चों में पाया जाने वाला एक सामान्य संक्रमण है। छोटे बच्चों से लेकर किशोरावस्था (5-15 साल तक) के बच्चों में अधिक होता है।
टॉन्सिल के लक्षण-
जब भी कोई व्यक्ति टॉन्सिल (Tonsils) की बीमारी से परेशान होता है तो उसका खाना-पीना बंद हो जाता है। गले में बराबर दर्द होता रहता है। टॉन्सिल के कारण गले में जलन और सूजन हो जाती है। कान के निचले भाग में भी दर्द रहता है।
जबड़ों के निचले हिस्से में सूजन।
गले में खराश महसूस होना एवं मुंह से बदबू आना। अत्यधिक कमजोरी, थकान और चिड़चिड़ापन होना टॉन्सिल के लक्षण हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, टॉन्सिल्स की बीमारी अस्वस्थ खान-पान के कारण होती है। यह मुख्यतः कफ दोष के कारण होती है। आप आयुर्वेदीय उपचार से शरीर के दोषों को ठीक कर सकते हैं, जिससे टॉन्सिल्स की सर्जरी कराने की स्थिति नहीं आती।

टॉन्सिल होने के कारण-
1- कम पानी पीने से भी टॉन्सिलाइटिस होने का खतरा होता है. दरअसल, खाना खाते वक्त भोजन के छोटे-छोटे कण मुंह में चिपके रह जाते हैं. खाना खाने के बाद पानी से कुल्ला करते हैं, तब मुंह के कण तो निकल जाते हैं लेकिन गले और आहार नली में कण चिपके रह जाते हैं. इसलिए खाना खाने के 15 मिनट बाद पानी जरूर पिएं और रोजाना कम से कम 4-5 लीटर पानी पिएं.
2- बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले वाली चीजों को खाने से भी टॉन्सिलाइटिस की दिक्कत हो जाती है.
3- इसके अलावा अगर बहुत ज्यादा गर्म या ठंडी चीज खाते हैं तो भी आपको टॉन्सिलाइटिस की समस्या हो सकती है. इसलिए खान-पान में सावधानी बरतें. खट्टी और ऑइली चीजों का सेवन बहुत ज्यादा न करें. हमारे यहां गरम चाय पीने के पहले ठंडा पानी पीने की आदत भी इस रोग को बढ़ने में योगदान देता हैं.
4- कई लोग अपना टूथब्रश जल्दी नहीं बदलते हैं और खराब होने के बाद भी उसका इस्तेमाल जारी रखते हैं. इससे भी गले में टॉन्सिल की समस्या हो जाती है. दरअसल, आप ब्रश करने के बाद रोज टूथब्रश धोते हैं लेकिन उन पर माइक्रोव्स चिपके रह जाते हैं. वक्त के साथ ये माइक्रोव्स आपको बीमार बनाने लगते हैं, इसलिए हर 2 महीने में अपना टूथब्रश जरूर बदलें. स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे.
टॉन्सिल्स होने के अन्य कारण भी होते हैंः-
1- वायरल इन्फेक्शन (कॉमन कोल्ड) के कारण।
2- टॉन्सिलाइटिस में होने वाला सबसे सामान्य रोग  Streptococcus Pyogenes है।
इसके अलावा स्टेफिललोकोकस ऑरियस (Staphylococcus Aureus), मायकोप्लाज्मा
3- निमोनिया ( Mycoplasma Pneumonia) भी एक कारण है।
4- इन्फ्लुएंजा के कारण टॉन्सिल्स होता है, जिसे फ्लू कहा जाता है।
5- रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से।

टॉन्सिल का इलाज करने के लिए घरेलू चिकित्सा

1- नमक के पानी से गरारा करें। इससे सूजन कम होती है। यह टॉन्सिल को घर पर ही ठीक करने का बहुत ही आसान उपाय है।

2- एक चम्मच शहद में नींबू के रस की 2-3 बूंद मिलाकर बच्चे को दिन में तीन बार सेवन कराएं।

3- गरम पानी में नींबू का रस और ताजा अदरक पीस कर मिलाएं। इस पानी से हर 30 मिनट में गरारा करें।

4- गरम पानी में नींबू का रस, चुटकी भर नमक, तथा काली मिर्च मिला कर गरारा करें।

5- अदरक के रस को शहद के साथ मिलाकर चाटने से सूजन तथा दर्द से आराम मिलता है।

6- गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी डालकर रात में सोने से पहले सेवन करें। हल्दी का सेवन  टॉन्सिल के साथ-साथ कई रोगों को ठीक करने में मदद करता है।

7- फिटकरी के पाउडर को पानी में उबालकर गरारा करें। यह टॉन्सिल की परेशानी को कम कर आपको आराम पहुंचाता है।

8- पानी में 4-5 लहसुन डाल कर उबाल लें। इस पानी से गरारा करें।

9- 6-7 ग्राम मेथी के बीजों को एक लीटर पानी में गरम करें। इससे दिन में तीन बार गरारा करें।

10- प्याज के रस को गुनगुने पानी में मिलाकर गरारा करें।

11- एक गिलास दूध में 4-6 तुलसी के पत्ते उबाल लें। गुनगुना होने पर आधा चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें।
12- महुआ की छल का कुल्ला करना लाभदायक होता हैं.
13- कत्था को बबूल की गोंद के साथ मिलकर शक़्कर को मुँह में रखकर चूसने से टॉन्सिल में बहुत लाभ होता हैं.
14- बबूल की छाल का काढ़ा का गरारा करना लाभदायक होता हैं.
15- कत्था का टुकड़ा और तिली का तेल में डुबोकरचूसने से गले में बहुत राहत मिलती हैं.
16- कुलंजन की जड़ का एक टुकड़ा मुँह रखकर चूसने से गले की सूजन और खराश में आराम लगता हैं. मीठी वचा को गर्म दूध में उबालकर पीने से सूजन में आराम और स्वर को साफ़ करता हैं.
17- सुबह लगभग 7-8 गिलास पानी को गुनगुना करें। इसमें नमक मिलाएं। उकड़ू होकर बैठ जाएं। अपनी क्षमता के अनुसार पानी पिएं। जब पानी गले तक आ जाए और उल्टी आने लगे, तब झुककर पेट को दबाएं। उंगली से जीभ को स्पर्श करें। ऐसा करने से उल्टी होगी। ऐसा पेट का सारा पानी बाहर निकलने तक करें। इसके आधे घण्टे बाद गुनगुना दूध पी  लें। यह क्रिया सुबह खाली पेट करनी चाहिए।
आप योग से भी टॉन्सिल का- उपचार कर सकते हैंः-
प्राणायाम करें।
कपालभांति, अनुलोम-विलोम, उज्जायी एवं भस्त्रिका करें।
कुंजल क्रिया करें।
सेतुबंधासन
पवनमुक्तासन
भुजंगासन
उष्ट्रासन
परहेज-

टॉन्सिल्स के लिए आयुर्वेदीय उपचार के दौरान ये परहेज करना चाहिएः-
कफवर्धक पदार्थो (दही, ठण्डा दूध, ठण्डा पानी, आईसक्रीम,
चावल) का सेवन बिल्कुल न करें।
बासी भोजन, जंकफूड का सेवन ना करें।
तला-भुना एवं अधिक मसालेदार भोजन न करें।
ठण्डी चीजे जैसे- दही, आइसक्रीम, ठण्डे पानी का सेवन बिल्कुल ना करें।
जंकफूड, तली-भुनी, मसालेदार चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।
खाने को फ्रिज में रखने के बाद बार-बार गर्म न करें। ऐसा करने से खाने के पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इससे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है।

-डा. रंजन विशद, मेडिकल अफसर, मीरगंज बरेली

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