नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 86 विधानसभा सीटें हैं। उत्तर प्रदेश में जिस दल ने इन आरक्षित सीटों पर बेहतर प्रदर्शन किया, सत्ता की दौड़ में उसका पलड़ा अक्सर भारी रहा है या यूं कहें कि प्रदेश में उसी की सरकार बनी है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी इस बार उम्मीदवारों के चयन में केवल जिला अध्यक्ष और नेताओं की सिफारिशों पर भरोसा नहीं करना चाहती। प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल स्वयं जिले-जिले जाकर बूथ और सेक्टर स्तर के कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं और टिकट के दावेदारों की वास्तविक ताकत परख रहे हैं।

बुधवार को फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित पीडीए कार्यकर्ता सम्मेलन भी इसी रणनीति का हिस्सा था, लेकिन यह सम्मेलन केवल संगठनात्मक बैठक बनकर नहीं रह गया। मंच पर हुए घटनाक्रम, कार्यकर्ताओं के तेवर, दावेदारों का शक्ति प्रदर्शन और नेताओं की आपसी खींचतान ने इसे पूरी तरह राजनीतिक संदेश देने वाला कार्यक्रम बना दिया। सम्मेलन के दौरान पूर्व प्रत्याशी विजयपाल सिंह को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई तो जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में रही। दूसरी ओर, चंद्रसेन सागर ने भीड़ जुटाकर अपनी ताकत का अहसास कराया, जबकि पूनम सेन और शालिनी सिंह का अलग-अलग रुख भी पूरे कार्यक्रम में चर्चा का विषय बना रहा। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी के टिकट के दावेदारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनकी दावेदारी के आधार के बारे में जानकारी ली। इस दौरान पार्टी के पूर्व प्रत्याशी विजयपाल सिंह की जमकर फजीहत हुई और जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव के विजयपाल प्रेम की भी पोल खुल गई।

दरअसल, प्रदेश अध्यक्ष ने भरी सभा में पार्टी कार्यकर्ताओं से अपनी बात रखने को कहा था। इसी दौरान पचौमी गांव के दो बार के प्रधान के पुत्र राहुल यादव की बारी आई। राहुल यादव ने विजयपाल सिंह का नाम तो नहीं लिया लेकिन स्पष्ट रूप से कहा कि वर्ष 2007 से 2012 में समाजवादी पार्टी के मुस्लिम और यादव नेताओं पर तत्कालीन विधायक ने बहुत अत्याचार किया था। बता दें कि वर्ष 2007 से 2012 तक विजयपाल सिंह ही फरीदपुर के विधायक थे लेकिन उस वक्त वह बहुजन समाज पार्टी से विधायक चुने गए थे।

राहुल यादव ने विजयपाल की ओर इशारा कर कहा कि यादवों और मुस्लिमों पर खूब फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए थे। यादव और मुस्लिमों को बहुत दर्द दिया गया था। बहुत प्रताड़ित किया गया था, हम उस दौर को भूले नहीं हैं। राहुल यादव आगे भी बहुत कुछ बोलना चाहते थे लेकिन जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव विजयपाल सिंह के पक्ष में उतर आए और बोले कि गिले-शिकवे यहां मत कीजिए। इसके बाद चर्चा होने लगी कि शुभलेश यादव विजयपाल सिंह पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। शुभलेश यादव का विजयपाल प्रेम समारोह के मंच पर भी देखने को मिला।
उनके इस प्रेम की वजह से अन्य दावेदारों को उपेक्षित कर दिया गया। इस समारोह में चंद्रसेन सागर और शालिनी सिंह के बैठने के लिए पहली लाइन में व्यवस्था नहीं की गई थी जबकि विजयपाल सिंह को पहली लाइन में जगह दी गई थी। साथ ही पहली लाइन में कुछ ऐसे नेताओं को भी जगह दी गई थी जो न तो पूर्व विधायक हैं और न ही पार्टी के कोई बड़े पदाधिकारी। जब दो बार के ब्लॉक प्रमुख और टिकट के दावेदार चंद्रसेन सागर सम्मेलन में पहुंचे तो वह जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव के इस सिटिंग अरेंजमेंट को देखकर भड़क गए। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के सामने ही अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सिटिंग अरेंजमेंट करने वाले को खूब खरी-खोटी सुनाई। फजीहत होते देखकर चंद्रसेन सागर के लिए पहली लाइन में कुर्सी लगवाई गई। इसके बाद चंद्रसेन सागर उस कुर्सी पर बैठे रहे।

कुछ देर बाद चंद्रसेन सागर की पुत्रवधु कल्पना सागर भी मंच पर आ गईं। उन्हें कुछ नेताओं ने चंद्रसेन सागर के बगल वाली सीट पर बैठने का इशारा किया तो वह चंद्रसेन सागर के पास वाली सीट पर बैठ गईं। पिछले समारोह में चंद्रसेन सागर के पैर छूकर आशीर्वाद लेने वाली कल्पना सागर ने बुधवार को उनके पैर नहीं छुए। जैसे ही कल्पना सागर चंद्रसेन सागर के बगल में बैठीं, चंद्रसेन सागर अपनी सीट छोड़कर मंच से नीचे उतर गए और सामने लगी कुर्सी पर बैठ गए। समारोह में ननद और भाभी की खूब चर्चा में रहीं। बता दें कि टिकट की दावेदर पूनम सेन और शालिनी सिंह के बीच ननद और भाभी का रिश्ता है। शालिनी सिंह भाभी हैं और पूनम सेन उनकी ननद। सम्मेलन में पूनम सेन समय से पहुंची थीं लेकिन शालिनी सिंह ने दूरी बनाए रखी। सम्मेलन में पहुंचे लोगों ने बताया कि शालिनी सिंह भी विजयपाल सिंह को पहली लाइन में जगह देने और उनकी (शालिनी सिंह) की कुर्सी पीछे वाली लाइन में लगाने से नाराज थीं। वह आयोजन स्थल के पास स्थित अपने कार्यालय में बैठी रहीं लेकिन कार्यक्रम में नहीं पहुंचीं। इसके विपरीत पूनम सेन ने ऐसी कोई नाराजगी नहीं जताई।

इस सम्मेलन में सबसे खास बात रही टिकट के दावेदारों के शक्ति प्रदर्शन की। इसमें चंद्रसेन सागर बाजी मार ले गए। दरअसल, सम्मेलन में बीएलए और भीड़ जुटाने के लिए टिकट के सभी दावेदारों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कौन सा दावेदार कितनी भीड़ जुटाने में सफल रहा इसका आकलन आम तौर पर नहीं हो पाता है। हर दावेदार अपनी भीड़ को सबसे अधिक बताता है। चंद्रसेन सागर ने इसका भी तोड़ निकाला और वह जितने लोगों को लेकर आए थे उन सभी को आईकार्ड दिए गए थे। चंद्रसेन सागर की ओर से जुटाए गए सभी लोगों ने लाल डोरी के साथ अपने गले में आई कार्ड पहने हुए थे, इससे साफ पता चल रहा था कि चंद्रसेन सागर कितने लोगों को लेकर आए हैं और बाकी दावेदार कितनी भीड़ जुटा पाए हैं। एक अनुमान के मुताबिक सम्मेलन में करीब एक हजार से 1200 तक की भीड़ जुटी थी जिनमें से अकेले चंद्रसेन सागर लगभग 600-700 कार्यकर्ताओं को लेकर पहुंचे थे जबकि बाकी 500 के लगभग लोग अन्य सभी दावेदार और संगठन के पदाधिकारी जुटा पाए थे। साफ है कि चंद्रसेन सागर शक्ति प्रदर्शन में बाजी मार ले गए। बहरहाल यह सम्मेलन कई संदेश देता नजर आया। विजयपाल सिंह ने पार्टी के कुछ पदाधिकारियों को खुश करके जो गुब्बारा भरा था उसकी हवा निकल गई। शुभलेश यादव का विजयपाल प्रेम भी सार्वजनिक हो गया और यह भी पता चल गया कि विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे किस नेता की जमीनी कार्यकर्ताओं पर कितनी पकड़ है।




