नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर वर्ष 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट को लेकर कई बड़े और चर्चित नाम सक्रिय हैं, लेकिन इस बार चर्चा केवल पुराने दावेदारों तक सीमित नहीं है। राजनीतिक गलियारों में एक नया नाम तेजी से उभर रहा है—समाजवादी पार्टी की महानगर उपाध्यक्ष सम्यून खान।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी कैंट विधानसभा में कोई बड़ा प्रयोग करने का फैसला करती है तो वह पुराने और लगातार चुनाव हार चुके चेहरों के बजाय एक युवा महिला उम्मीदवार पर दांव खेल सकती है। ऐसे में सम्यून खान की दावेदारी केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि पार्टी की बदलती राजनीतिक रणनीति का संकेत भी मानी जा रही है।
कैंट विधानसभा सीट पर इस समय जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें वरिष्ठ पार्षद राजेश अग्रवाल, डॉ. अनीस बेग, इंजीनियर अनीस अहमद खां और संजीव सक्सेना प्रमुख हैं। सभी अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार के साथ सक्रिय हैं।
लेकिन सबसे अधिक चर्चा उस सवाल की हो रही है कि क्या समाजवादी पार्टी फिर से उन्हीं चेहरों पर भरोसा करेगी, जिन्हें जनता पहले देख और परख चुकी है, या फिर वह बदलाव का संदेश देते हुए किसी नए और जमीनी कार्यकर्ता को सामने लाएगी?
यहीं से सम्यून खान का नाम राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ जाता है।

एक आम कार्यकर्ता से संभावित उम्मीदवार तक का सफर
सम्यून खान का राजनीतिक सफर किसी बड़े राजनीतिक परिवार की विरासत से नहीं जुड़ा है। वे किसान परिवार से आती हैं और अपने दम पर संगठन में पहचान बनाई है। यही कारण है कि उनकी कहानी समाजवादी राजनीति के उस मूल सिद्धांत से मेल खाती है, जिसमें साधारण कार्यकर्ता के आगे बढ़ने की बात कही जाती रही है।
करीब एक दशक से वह कैंट विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने केवल चुनावी मौसम में राजनीति नहीं की, बल्कि बूथ स्तर पर लगातार संगठन निर्माण का कार्य किया। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने टिकट की कोई दावेदारी नहीं की और पूरी ऊर्जा कार्यकर्ताओं को जोड़ने तथा अपनी पकड़ मजबूत करने में लगाई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह धैर्य और दीर्घकालिक रणनीति ही आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आ रही है।
48 प्रतिशत महिला आबादी और नया राजनीतिक संदेश
कैंट विधानसभा क्षेत्र की लगभग 48 प्रतिशत आबादी महिलाओं की है। ऐसे में किसी महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारना केवल प्रतीकात्मक फैसला नहीं होगा, बल्कि एक बड़े सामाजिक संदेश का माध्यम भी बन सकता है।
महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर भाजपा लगातार विपक्ष को घेरती रही है। ऐसे माहौल में यदि समाजवादी पार्टी किसी युवा महिला चेहरे को टिकट देती है तो वह यह संदेश देने की कोशिश कर सकती है कि महिलाओं को केवल मंच तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा में भी लाया जाएगा।
सम्यून खान इस रणनीति में पूरी तरह फिट बैठती दिखाई देती हैं। वे न केवल महिला हैं, बल्कि सामाजिक कार्यों के जरिए महिलाओं के बीच सक्रिय भी रही हैं। उनकी संस्था ‘आम औरत सेवा समिति’ के माध्यम से उन्होंने महिला मुद्दों पर काम किया है, जिससे उनका सीधा संवाद जमीनी स्तर तक बना है।
युवा, कला और सामाजिक सरोकारों का अनोखा मिश्रण
सम्यून खान केवल राजनेता नहीं हैं। वे पेशे से फैशन डिजाइनर हैं और थिएटर आर्टिस्ट भी हैं। यह बहुआयामी व्यक्तित्व उन्हें पारंपरिक नेताओं से अलग पहचान देता है।
आज की राजनीति में युवाओं को जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में सम्यून खान के साथ काम करने वाली युवाओं की बड़ी टीम उनकी सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पूंजी मानी जा रही है।
वे सोशल मीडिया, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक अभियानों के जरिए युवाओं के बीच संवाद स्थापित करने में सफल रही हैं। यही वजह है कि उनका समर्थन आधार केवल किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं दिखाई देता।

सुप्रिया ऐरन के विकल्प के रूप में उभरता नाम
कैंट विधानसभा की राजनीति में पूर्व प्रत्याशी सुप्रिया ऐरन का नाम लंबे समय से जुड़ा रहा है। लेकिन कई बार चुनावी हार के बाद कार्यकर्ताओं और आम मतदाताओं के बीच उनके प्रति उत्साह पहले जैसा नहीं रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैंट सीट से लगातार हार झेलने के बाद पार्टी नेतृत्व भी अब नए विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर सकता है।
यदि ऐसा होता है तो सम्यून खान स्वाभाविक रूप से सबसे मजबूत महिला विकल्प के रूप में सामने आती हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे संगठन से निकली हुई कार्यकर्ता हैं और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन को धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर तैयार किया है।
हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या समाजवादी पार्टी इतना बड़ा राजनीतिक जोखिम उठाने को तैयार होगी?
एक तरफ अनुभवी और संसाधन संपन्न नेता हैं, जिनकी अपनी राजनीतिक हैसियत है। दूसरी तरफ सम्यून खान जैसी नई और अपेक्षाकृत युवा नेता हैं, जिनके पास संगठनात्मक मेहनत और जनसंपर्क की ताकत है।
लेकिन राजनीति केवल अनुभव का खेल नहीं होती, समय-समय पर नए प्रयोग भी सत्ता का रास्ता खोलते हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई बार ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जब आम कार्यकर्ताओं को मौका देकर दलों ने नया राजनीतिक संदेश दिया और उसका लाभ भी उठाया।
समाजवादी पार्टी यदि कैंट विधानसभा में बदलाव और महिला नेतृत्व का संदेश देना चाहती है तो सम्यून खान उसके लिए उपयुक्त चेहरा बन सकती हैं।
संगठन में मजबूत छवि भी बड़ा कारक
पार्टी के भीतर सम्यून खान की छवि एक सक्रिय, जुझारू और कर्मठ नेत्री की मानी जाती है। संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी लगातार भागीदारी और बूथ स्तर पर सक्रियता ने उन्हें नेतृत्व की नजरों में भी महत्वपूर्ण बनाया है।
राजनीति के जानकार मानते हैं कि टिकट वितरण में केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि संगठन के प्रति निष्ठा और दीर्घकालिक काम भी अहम भूमिका निभाते हैं। इस कसौटी पर सम्यून खान मजबूत दावेदारों में गिनी जा रही हैं।
2027 का चुनाव और बदलाव की संभावनाएं
आखिरकार, 2027 का चुनाव केवल व्यक्तियों का नहीं बल्कि राजनीतिक संदेशों का भी चुनाव होगा। समाजवादी पार्टी यदि कैंट विधानसभा में पुराने समीकरणों से बाहर निकलकर नई राजनीति का प्रयोग करती है, तो सम्यून खान उसका चेहरा बन सकती हैं।
यह फैसला केवल एक उम्मीदवार तय करने का नहीं होगा, बल्कि यह संदेश देने का भी होगा कि पार्टी में आम कार्यकर्ता, युवा और महिलाएं भी शीर्ष राजनीतिक जिम्मेदारियों तक पहुंच सकती हैं।
बरेली कैंट की राजनीति इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। पुराने अनुभव और नई ऊर्जा के बीच चल रही इस प्रतिस्पर्धा में फिलहाल इतना तो तय माना जा रहा है कि सम्यून खान अब केवल एक कार्यकर्ता नहीं रहीं, बल्कि वे समाजवादी पार्टी की संभावित राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। यदि पार्टी नेतृत्व बदलाव का साहस दिखाता है, तो 2027 में कैंट विधानसभा से एक नया महिला चेहरा पूरे राजनीतिक समीकरण को बदलता हुआ दिखाई दे सकता है।




