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1 जून पुण्य तिथि पर विशेष : देशभक्ति, साहस और धैर्य की सजीव प्रतिमा थीं शहीद भगत सिंह की मां विद्यावती कौर

इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वालों के मन पर ऐसे संस्कार उनकी माताओं ने ही डाले हैं। भारत के स्वाधीनता संग्राम में हंसते हुए फांसी चढ़ने वाले वीरों में भगतसिंह का नाम प्रमुख है। उस वीर की माता थीं श्रीमती विद्यावती कौर। […]

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31 मई जयंती पर विशेष : वीरता और त्याग की प्रतीक रानी अहिल्याबाई होल्कर

भारत में जिन महिलाओं का जीवन आदर्श, वीरता, त्याग तथा देशभक्ति के लिए सदा याद किया जाता है, उनमें रानी अहल्याबाई होल्कर का नाम प्रमुख है। उनका जन्म 31 मई, 1725 को ग्राम छौंदी (अहमदनगर, महाराष्ट्र) में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री मनकोजी राव शिन्दे परम शिवभक्त थे। अतः यही […]

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समाज,राष्ट्र का सजग सतर्क प्रहरी,पत्रकार…

कभी मीठा तो कभी चीत्कार लिखता है। कभी विपक्ष कभी सरकार लिखता है।। कलम का सिपाही रुकता नहीं कभी। हर बात वह तो बार बार लिखता है।। कभी आरपार कभी कारोबार लिखता है। कभी विसंगति और प्रचार लिखता है।। समाज राष्ट्र के हर बिंदु को छूती कलम। हर विषय की वह भरमार लिखता है।। कभी […]

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प्रमोद पारवाला की कविताएं : कलमवीर

जान हथेली पर रखकर भी, जो तिनका- तिनका बीनते हैं। सत्य के उजाले मे ही वे, झूठ का मुखौटा छीनते है। अपनी खबर नहीं है उनको, दुनिया की खबरें बुनते हैं। पाताल लोक मे भी जाकर, खबरों के मोती चुनते हैं। हम एक धुरी पर बैठे ही, दुनिया की सब खबरें पाते। अगर न होते […]

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30 मई पत्रकारिता दिवस पर विशेष : पत्रकारों के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं निर्भय सक्सेना

संजीव कुमार शर्मा गंभीर, बरेली वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना को बरेली ही नहीं बल्कि देश और प्रदेश की पत्रकारिता में कौन नहीं जानता होगा। बरेली के लोग शायद यह नहीं जानते होंगे कि नावल्टी चौराहे के पास सिंघल लाइब्रेरी के ठीक बराबर में छत पर जिस ‘यू. पी. जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ के ‘उपजा प्रेस क्लब’ की […]

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30 मई हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष : राष्ट्रीय चेतना को जगाने के लिए शुरू हुआ हिंदी पत्रकारिता का सफर

हिन्दी पत्रकारिता की कहानी भारतीय राष्ट्रीयता की कहानी है। हिन्दी पत्रकारिता के आदि उन्नायक जातीय चेतना, युगबोध और अपने दायित्व के प्रति पूर्ण सचेत थे। इसलिए विदेशी सरकार की दमन-नीति का उन्हें शिकार होना पड़ा था, उसके नृशंस व्यवहार की यातना झेलनी पड़ी थी। उन्नीसवीं शताब्दी में हिन्दी गद्य-निर्माण की चेष्टा और हिन्दी-प्रचार आन्दोलन अत्यन्त […]

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30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस : सत्य को प्रकाशित करने के लिए मोमबत्ती की तरह जलता है पत्रकार

हिन्दी पत्रकारिता की कहानी, भारतीय राष्ट्रीयता की कहानी है। हिन्दी पत्रकारिता के उन्नायक अपने राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति पूरी तरह से सजग और सचेत थे। पत्रकारिता उनके लिए एक मिशन थी, महज प्रोफेशन नहीं। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में उच्च मानदण्डों को स्थापित किया। परिस्थितियाँ कितनी भी विषम और जटिल क्यों न रही हों उन्होंने […]

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हमारे भारतीय त्योहार केवल पर्व ही नहीं संबधों की प्रगाढ़ता का सुअवसर भी हैं

होली ,दीवाली, दशहरा,रक्षा बंधन, दुर्गा पूजा,नवरात्रि,लोहड़ी व अन्य केवल रंगों के खेलने व आतिशबाजी व अन्य बातों के त्यौहार ही नहीं है,अपितु दिलों का रंगना,मिलना इसमें परम आवश्यक है।रंगों के बहने के साथ ही मन का मैल बहना भी बहुत आवश्यक है ,तभी होली की सार्थकता है।और दीपावली पर जाकर मिलना ,उनके हाथ से मीठा […]

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न मानी कभी बात माँ- बाप की

कहानी बनी आज संताप की, कड़ी अब जुड़ी वार्तालाप की न मानी कभी बात माँ-बाप की, चलें आज गठरी लिए पाप की। भरी ऐंठ इतनी न कुछ भी सुना, कहा कुछ किसी ने उसी को धुना लड़ी आँख जिससे उसे ही चुना, मगर प्यार का जाल ऐसा बुना बने फिर कहीं वह कभी आपकी, रखी […]

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दुआओं की सौगात है, बुजुर्गों के पास…

क्षमा दुआ अनुभव और आस, है बुजुर्गों के पास। बहुत ही जिम्मेदारी अहसास, है बुजुर्गों के पास।। छोटे बड़ों का ध्यान और करें, घर की रखवाली भी। संस्कृति, संस्कारों का वास है, बुजुर्गों के पास।। बहुत दुनिया देखी बड़ों ने, उनसे ज्ञान लीजिये। उन्होंने किया लालन पालन, उन पर ध्यान दीजिए।। उनके मान सम्मानआशीर्वाद से, […]