इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वालों के मन पर ऐसे संस्कार उनकी माताओं ने ही डाले हैं। भारत के स्वाधीनता संग्राम में हंसते हुए फांसी चढ़ने वाले वीरों में भगतसिंह का नाम प्रमुख है। उस वीर की माता थीं श्रीमती विद्यावती कौर। […]
विचार
30 मई हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष : राष्ट्रीय चेतना को जगाने के लिए शुरू हुआ हिंदी पत्रकारिता का सफर
हिन्दी पत्रकारिता की कहानी भारतीय राष्ट्रीयता की कहानी है। हिन्दी पत्रकारिता के आदि उन्नायक जातीय चेतना, युगबोध और अपने दायित्व के प्रति पूर्ण सचेत थे। इसलिए विदेशी सरकार की दमन-नीति का उन्हें शिकार होना पड़ा था, उसके नृशंस व्यवहार की यातना झेलनी पड़ी थी। उन्नीसवीं शताब्दी में हिन्दी गद्य-निर्माण की चेष्टा और हिन्दी-प्रचार आन्दोलन अत्यन्त […]
30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस : सत्य को प्रकाशित करने के लिए मोमबत्ती की तरह जलता है पत्रकार
हिन्दी पत्रकारिता की कहानी, भारतीय राष्ट्रीयता की कहानी है। हिन्दी पत्रकारिता के उन्नायक अपने राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति पूरी तरह से सजग और सचेत थे। पत्रकारिता उनके लिए एक मिशन थी, महज प्रोफेशन नहीं। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में उच्च मानदण्डों को स्थापित किया। परिस्थितियाँ कितनी भी विषम और जटिल क्यों न रही हों उन्होंने […]
हमारे भारतीय त्योहार केवल पर्व ही नहीं संबधों की प्रगाढ़ता का सुअवसर भी हैं
होली ,दीवाली, दशहरा,रक्षा बंधन, दुर्गा पूजा,नवरात्रि,लोहड़ी व अन्य केवल रंगों के खेलने व आतिशबाजी व अन्य बातों के त्यौहार ही नहीं है,अपितु दिलों का रंगना,मिलना इसमें परम आवश्यक है।रंगों के बहने के साथ ही मन का मैल बहना भी बहुत आवश्यक है ,तभी होली की सार्थकता है।और दीपावली पर जाकर मिलना ,उनके हाथ से मीठा […]
दुआओं की सौगात है, बुजुर्गों के पास…
क्षमा दुआ अनुभव और आस, है बुजुर्गों के पास। बहुत ही जिम्मेदारी अहसास, है बुजुर्गों के पास।। छोटे बड़ों का ध्यान और करें, घर की रखवाली भी। संस्कृति, संस्कारों का वास है, बुजुर्गों के पास।। बहुत दुनिया देखी बड़ों ने, उनसे ज्ञान लीजिये। उन्होंने किया लालन पालन, उन पर ध्यान दीजिए।। उनके मान सम्मानआशीर्वाद से, […]








