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तिकड़मों के बिना हैसियत थी कहां…

हाय मतलब यहाँ सिद्ध जिसका हुआ, आज घोड़े वही बेचकर सो रहा और उल्लू बनाया गया हो जिसे, बैठकर बेबसी में बहुत रो रहा। आदमी का न कोई भरोसा रहा, क्या पता कौन कब खोपड़ी फोड़ दे और पीड़ित न पैसा करे खर्च तो, फिर पुलिस भी उसे अब नया मोड़ दे हाय घटना बदलकर […]

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कोरोना कब रोक सकेगा …

रोज़ बढे़ंगे- रोज़ बढ़ेंगे, हम अविराम- हम अविराम. प्राप्त करेंगे- प्राप्त करेंगे, सब परिणाम- सब परिणाम. इस अदृश्य ताकत से भी हम, टकरायेंगे जी भरकर. निकट समय में खुशी पताका, फहरायेंगे जी भरकर. साथ सहेंगे- साथ सहेंगे, हर अंजाम- हर अंजाम. प्राप्त करेंगे… मानव ने कर्मठता- बल पर, काम अनोखे कर डाले. दानव सी बीमारी […]

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फिर से विश्व गुरु की पहचान वाला,भारत महान होगा

मिलकर धूल में भी हम खड़े हो सकते हैं। टूटकर फिर हम दुबारा बड़े हो सकते हैं।। गिर कर भी फिर वैसे ही उठना आता हमको। देख लेना फिर वैसे ही आसमां चढ़े हो सकते हैं।। परीक्षा यूँ ही बारम्बार हम देकर आयेंगे। खुशियां अपरम्पार हम फिर जाकर लायेंगे।। माना कि मुसीबत है और समय […]

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प्रमोद पारवाला की कविताएं- ‘अनुभूति’

कब दिन निकला कब रात हुई, हम समझ भी नहीं पाते हैं। बच्चों का कलरव सुनने को, यह कान तरस से जाते हैं। हर ओर कराहट जीवन की, एक स्वर हमारा शामिल है। मृत्यु से जंग भी जारी है, फिर भी न हमें कुछ हासिल है। कोरोना तू तो अकेला है पर उनके तो घरवाले […]

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पात्रता को न कोई यहां पूछता…

माल भेजा गया था किसी के लिए, हाय कुछ लोग मिल बाँट कर खा गए पात्रता को न कोई यहाँ पूछता, तिकड़मों से वही आज फिर छा गए। योजनाएँ बहुत भ्रष्ट होती रहीं, और जल की तरह खूब पैसा बहा निर्बलों का न इससे भला कुछ हुआ, जानकर भी किसी ने नहीं कुछ कहा दिख […]

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जिस गली से गुजरो सलाम हो तुमको…

जिस गली से गुजरो सलाम हो तुमको। सबकी खुशी का पैगाम हो तुमको।। महसूस हो दर्द सबका तुम्हारे दिल में। सुन सबकी खैरियतआराम हो तुमको।। हर किसी के ही काम तुम आ सको। जो भी मिले खास ओ आम हो तुमको।। मोहब्बत से तो भरोसा कभी न उठे। चाहे लगे इसका मंहगा दाम हो तुमको।। […]

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प्यार के दीप जलकर भला क्या करें…

कब कहाँ कौन है अब सुरक्षित यहाँ, लोग घर से निकलते हुए भी डरें हाय नफरत उगलती रही आग जब, प्यार के दीप जलकर भला क्या करें। बढ़ गयी है बहुत लालसा की तपन, और इंसानियत हो गयी अब दफन कूटनीतिक व्यवस्था हुई बेरहम, जो मरा आज उसका चुरा है कफन लोग संवेदना बेचकर खा […]

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ऑक्सीजन बिना वे तड़पकर मरें

कोठियों ने उजाड़े यहाँ घोंसले, हाय पक्षी बसेरा कहाँ पर करें पेड़ काटे गए आज इतने अधिक, ऑक्सीजन बिना वे तड़पकर मरें। ऐंठ मेंआज मानव भरा खूब है, क्यों मलिन कर रहा हाय पर्यावरण रेडियोधर्मिता बढ़ गयी है यहाँ, भूत अब वायरस का करे जागरण लोग उल्लू यहाँ अब बनाने लगे, इसलिए सामने आ रहा […]

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कोरोना को हार मिलेगी…

सब कुछ होगा ठीक एक दिन मन में ये विश्वास रखें. कोरोना को हार मिलेगी, ह्रदयों में आभास रखें. अपना- अपना काम करें हम. व्यस्त रहें ये सोचें हम. करें सार्थक कुछ ना कुछ सब. कोरोना को भूलें हम. जैसे भी संभव हो पाये. औरों का हित कर दें हम. इतना ना जप कोरोना को, […]

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अंहकार जीवन में एक मादक सर्प समान है

अहंकार का नशा बहुत मतवाला होता है। मनुष्य नहीं स्वयं का ही रखवाला होता है।। एक दिन आसमां से जमीं पर जरूर है गिरता। अहम क्रोध केवल बुद्धि का दिवाला होता है।। वो कहलाता सभ्य सुशील जो सरल होता है। वो कहलाता विनम्र शालीन जो तरल होता है।। इसी में है बुद्धिमानी कि व्यक्ति सहज […]