तुम केंद्र तुम धुरी तुम सृष्टि की रचनाकार हो। तुम धरती पर मूरत प्रभु की साकार हो।। तुम जगत जननी हो तुम संसार रचयिता। माँ बहन पत्नी जीवन में हर प्रकार हो।। तुम से ही ममता स्नेह प्रेम जीवित रहता है। मन सच्चा कभी कपट कुछ नहीं कहता है।। त्याग समर्पण का जीवंत स्वरूप हो […]






