विचार

नारी ।। तुम केंद्र ,तुम धुरी, सृष्टि की रचनाकार हो…

तुम केंद्र तुम धुरी तुम सृष्टि की रचनाकार हो। तुम धरती पर मूरत प्रभु की साकार हो।। तुम जगत जननी हो तुम संसार रचयिता। माँ बहन पत्नी जीवन में हर प्रकार हो।। तुम से ही ममता स्नेह प्रेम जीवित रहता है। मन सच्चा कभी कपट कुछ नहीं कहता है।। त्याग समर्पण का जीवंत स्वरूप हो […]

विचार

9 मई मदर्स डे पर विशेष “मां”

मां के आंचल की छाया में, चैन की नींद सो जाते थे। मां कब जागी मां कब सोई, हम यह भी जान न पाते थे। दूध लिये बस आगे पीछे, सौ नखरे भी उठाती थी। “चूहा खाना खा जायेगा,’ यह कहकर रोज खिलाती थी। किसी बात से डर लगता था, झट माँ की गोद में […]

विचार

तू हार मानकर ही, मानेगा कोरोना

सौगंध उठाते हैं, हारेगा कोरोना. तू हार मानकर ही, मानेगा कोरोना. हर बीमारी भागी, इस मानव के आगे. हर रोग वायरस सब, हरदम ही हैं भागे. पापों की गठरी ले, भागेगा कोरोना. सौगंध… चलता था सब सुखमय, मानव का पृथ्वी पर. हर बुरी बात लाया, दानव सा धरती पर. करनी का फल निश्चित, पायेगा कोरोना. […]

विचार

कितनी पीड़ा अब देखो, तीमारदार सहते हैं…

कितनी पीड़ा अब देखो, तीमारदार सहते हैं दुत्कारा जाता जिनको, आँसू पीकर रहते हैं । बेबस मरीज की आहें, बेरहम नहीं हैं सुनते दौलत का खेल चल रहा, ताने-बाने वे बुनते बीमार भले मर जाए, वे अपना मतलब चुनते उनके कारण कितने ही, देखे अपना सिर धुनते घर में मर जाना अच्छा, कुछ लोग यही […]

विचार

कोरोना को जाने दो…

हर घर खुशियां छाने दो. कोरोना को जाने दो. कितनी गाली खाता है फिर भी दूर न जाता है. सारे तुझको बुरा कहें फिर भी भू पर छाता है. नहीं बुलाया लेकिन तू बेशर्मी से आता है. उल्टी बातें सुनना ही शायद तुझको भाता है. झूठा- कपटी कोरोना राग गमों के गाता है. हंसी लवों […]

विचार

लोग दिल में भी दिमाग लिये घूमते हैं…

लोग दिल में भी दिमाग लिये घूमते हैं क्या कहें उजाले में चिराग लिये घूमते हैं दर्द होता नहीं है सीने में दर्द देख कर जुबान पर भी अपने आग लिये घूमते हैं मोहब्बत की तिजारत का करते कारोबार दिल दिमाग में तो द्वेष राग लिये घूमते हैं जहर बुझा सा हो गया अब यह […]

विचार

हमेशा जीने की उम्मीद जिंदा रखना…

हमेशा जीने की उम्मीद जिंदा रखना सबके लिए दिल में दीद जिंदा रखना वक़्त बहुत नाजुक जगह नहीं नफ़रत की हमेशा महोब्बत की खरीद जिंदा रखना हर हालात में हमें जीत कर ही आना है इस बात की भी तसदीक जिंदा रखना कभी आँख के आँसू सूखने नहीं देना सबका दर्द दिल के नज़दीक जिंदा […]

विचार

मजदूर दिवस पर विशेष : सिसकती जिंदगी…

नैनों में अविरल धारा है , मुख पर करुणा सी सिसक रही। है धंसी हुई आंखें जिनमें, गाथा अतीत की थिरक रही। पलकों में कुछ भारीपन सा, दारिद्रय दिखाते मलिन वसन । माथे पर झुर्री पड़ी हुई, है यौवन में भी जर्जर तन। मलिन वसन के अवगु्ठनमें, छिपा हुआ शशि सा मुखड़ा। दिल में है […]

विचार

देखना कि कोई ज़ख्म नासूर न बन जाये…

देखना कि कोई ज़ख्म नासूर न बन जाये बिना वजह कोई बात कसूर न बन जाये लाज़िम कि बोलें हर बात सोच समझ के कोई बात यूँ ही बेहूदा शहूर न बन जाये दिल दुखाने का किसी को अख्तियार नहीं चाहे कोई कितना भी क्यों मशहूर न बन जाये धन दौलत यह सब तो आनी […]

विचार

या रब क्यों इतने…

या रब क्यों इतने निष्ठुर हो जो न तेरा मान धरें क्यों उनके लिए छिपे बैठे हो आ जाओ उनके लिए बस जो तेरे लिए समर्पित हैं तुम तो जानों ये बेटी तेरी अब भी कितनी तटस्थ खड़ी सारा जग मायूस खड़ा है पर ये बेटी तेरी अडिग बड़ी तुझसे अटूट जो आस जुड़ी रख […]